प्रदेश का राजकीय पशु वनभैंसा विलुप्ति की कगार पर है, विभाग के रिकॉर्ड में मादा वनभैंसा नहीं है।
रायपुर. प्रदेश का राजकीय पशु वनभैंसा विलुप्ति की कगार पर है, विभाग के रिकॉर्ड में मादा वनभैंसा नहीं है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने केंद्र को असम से पांच मादा वनभैंसा दिए जाने की मांग की थी, ताकि राजकीय पशु की संख्या बढ़ाई जा सकी है। अच्छी खबर यह है कि केंद्र ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। वन मंत्री मो. अकबर ने पुष्ठि की है कि छत्तीसगढ़ को पांच मादा वन भैंसा मिल रहे हैं। गौरतलब है कि इन सभी को बारनवापारा अभ्यारण्य में रखा जाएगा, जहां इनके लिए बाड़ा बनाया गया है।
राज्य सरकार के आंकड़े ही है कि प्रदेश में वर्तमान में कुल वन भैंसों की संख्या 10 हैं, इनमें आठ नर है। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि वे वन्यजीव अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। बीते कुछ सालों में दो वन भैंसों की मौते हो चुकी है। एक आज भी लापता है।
राज्य सरकार ने वनभैसों की संख्या बढ़ाने के लिए 2005 में प्रोजेक्ट बनाया। प्रजनन के लिए उदंती सीतानदी को चुना गया। यहां बाड़ा बनाया गया। यह प्रोजेक्ट बहुत ज्यादा सफल साबित नहीं हुआ है। इस पर अभी काम जारी है।
मादा नस्ल की भैंस केवल एक बची है। वन्य जीव की प्रजाति को बचाने के लिए करनाल से मादा वन भैंसे का क्लोन तैयार किया गया है और इसे फिलहाल जंगल सफारी के बाड़े में रखा गया है।