
QR कोड के दौर में चिल्हर का संकट (फोटो सोर्स- पत्रिका))
रायपुर@अजय रघुवंशी। Coin Shortage: डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और लगभग हर दुकान पर क्यूआर कोड उपलब्ध होने के बावजूद बाजार में छुट्टे पैसों यानी चिल्हर की कमी व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। व्यापारियों की मांग के बाद स्थिति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रायपुर कार्यालय ने अपने नागपुर मुख्यालय को प्रदेश के लिए करीब 20 करोड़ रुपए की चिल्हर उपलब्ध कराने की मांग की है।
व्यापारिक संगठनों के अनुसार बाजार में विशेष रूप से 5, 10 और 20 रुपए के नोटों की भारी कमी महसूस की जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर परिवहन, किराना, मेडिकल स्टोर, फल-सब्जी विक्रेताओं, चाय-नाश्ता केंद्रों तथा अन्य दैनिक उपयोग के व्यवसायों पर पड़ रहा है, जहां छोटे मूल्य के लेनदेन अधिक होते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने के बाद आरबीआई की ओर से छोटे नोटों और सिक्कों की आपूर्ति पहले की तुलना में कम हो गई है। हालांकि दूसरी ओर ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान और छोटे कारोबारों के विस्तार के कारण रेहड़ी, ठेला, फुटपाथ दुकानदारों तथा ग्रामीण बाजारों में चिल्हर की मांग लगातार बढ़ी है। कई ग्राहक अब भी छोटे भुगतान नकद में करना पसंद करते हैं, जिससे छुट्टे पैसों की आवश्यकता बनी हुई है।
व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों ने आरबीआई के क्षेत्रीय महाप्रबंधक से मुलाकात कर प्रदेश में चिल्हर संकट की जानकारी दी और तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की। बताया जा रहा है कि नागपुर मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश के बैंकों को जल्द ही छोटे नोटों और सिक्कों का अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध कराया जा सकता है।
डिजिटल ट्रांजिक्शन के बढ़ते दौर में लोकल फॉर वोकल भी बढ़ा है। कई स्थानों पर छोटी खरीदी के लिए डिजिटल ट्रांजिक्शन के बजाय लोग नकदी में लेन-देन पसंद कर रहे हैं। बाजार में लगभग 20 करोड़ रुपए के चिल्हर की कमी है। इस संबंध में हमने आरबीआई रायपुर को ज्ञापन सौंपा था। अब आरबीआई नागपुर के माध्यम से राशि की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। - अमर पारवानी, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)
Updated on:
08 Jun 2026 09:23 am
Published on:
08 Jun 2026 09:23 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
