खाद्य पदार्थों की जांच करने वाली प्रदेश की एकमात्र प्रयोगशाला (सेंट्रल लैब) आउटडेटेड हो गई है।
रायपुर. खाद्य पदार्थों की जांच करने वाली प्रदेश की एकमात्र प्रयोगशाला (सेंट्रल लैब) आउटडेटेड हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा नहीं उतरने से 2002 में कालीबाड़ी स्थित सरकारी लैब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड केलिब्रेशन लेबोरेट्री (एनएबीएल) ने मान्यता खत्म कर दी है। अब प्रदेश में खाद्य पदार्थों रहे सैंपल जांच अब नहीं हो पाएगी।
गौरतलब है कि 16 साल बाद भी तकरीबन 70 फीसदी खाद्य पदार्थों के सैम्पलों की जांच रायपुर में नहीं होती है। इसके लिए पुणे या कोलकाता सैम्पल भेजा जाता है। दरअसल, लैब में जांच मशीनें एफएसएसएआई से आने के बाद भी इंस्टाल नहीं हो पाई है। इसके अलावा ड्रग टेस्टिंग लैब रायपुर में 64 में 43 पद खाली हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरटी ऑफ इंडिया ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आदेश में 14 राज्यों की 36 लैबों की भी मान्यता भी समाप्त की गई है।
एकमात्र फूड एनॉलिस्ट मान्यता समाप्त होने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि लैब में फूड टेस्टिंग एनालिस्ट की कमी होना है। यहां सिर्फ एक एनॉलिस्ट है जो कि लैब टेक्नीशियन के पद से प्रमोट हुए है। जबकि कम से कम पांच एनॉलिस्ट होने चाहिए। इस संबंध में एफएसएसएआई ने पत्र जारी कर मांग पत्र भेजने के लिए कहा था। जो कि विभाग द्वारा नहीं भेजा गया। बतादें कि वर्तमान में लैब टेक्नेशियन पद पर सिर्फ दो लोग काम कर रहे हैं।
राजेश शुक्ला, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
(आईएसओ, आईईसी 17025:2005) लेना अनिवार्य है