पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और व्यवसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में आई कमी का परिणाम अब लोगों के घरों तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ में वाणिज्यिक सिलेंडर की आपूर्ति रुकने के कारण होटल कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि अधिकांश होटल संचालकों के पास स्टॉक रहने के कारण फिलहाल मेन्यू […]
पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और व्यवसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में आई कमी का परिणाम अब लोगों के घरों तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ में वाणिज्यिक सिलेंडर की आपूर्ति रुकने के कारण होटल कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि अधिकांश होटल संचालकों के पास स्टॉक रहने के कारण फिलहाल मेन्यू कम किए गए हैं। वहीं 20 फीसदी तक कीमतों में इजाफा किया गया है। साथ ही गैस का कम से कम इस्तेमाल किया जा रहा है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन वेस्टर्न जोन के अध्यक्ष कमलजीत होरा ने बताया कि गैस के स्थान पर अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए जल्द ही होटल संचालकों की बैठक का आयोजन जाने की तैयारी चल रही है ताकि होटल उद्योग को बचाया जा सकें। इस समय अधिकांश होटलों और रेस्टोरेंट संचालकों के पास स्टॉक है। अगर युद्ध जल्दी ही खत्म नहीं होगा तो कारोबार प्रभावित होगा। कर्मचारियों की कटौती और चाय-नाश्ते से लेकर भोजन की कीमतों को बढ़ाना पड़ सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा 5 मार्च को अधिसूचना जारी कर वाणिज्यिक उपयोग वाले एलपीजी गैस पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके चलते रायपुर सहित प्रदेशभर के शहरों में होटल संचालकों पर असर पड़ा है।
होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस के स्थान पर इंडक्शन, ओवन, डीजल से चलने वाले स्टोव, लकड़ी और कोयले की भट्टी के इस्तेमाल शुरू हो गया है। हालांकि बड़े होटलों में लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर करीब 50 फीसदी होटलों और रेस्टोरेंट पर पड़ा है। गैस एलपीजी का स्टॉक बहुत सीमित होने के कारण अन्य विकल्पों का उपयोग किया जाएगा। यदि अगले दो दिन में आपूर्ति सामान्य नहीं होने पर कई होटल अस्थाई रूप से रूप से बंद करने पड़ सकते हैं। बता दें कि प्रदेश में छोटे बड़े होटल-रेस्टोरेंट और ढाबा की संख्या करीब 12500 है।
स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी ने बताया कि सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने से उद्योगों पर इसका असर पड़ना शुरू हो गया है। प्रदेश के 600 से ज्यादा उद्योगों में रोजाना करीब 3000 सिलेंडरों का जरूरत पड़ती है। इस समय अधिकांश उद्योगों में सिलेंडर का स्टॉक होने के कारण किसी तरह काम चल रहा है लेकिन, प्रतिबंध लगाए जाने से उत्पादन पर असर पड़ा है। इसे लेकर जल्दी ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर अपनी समस्या को रखा जाएगा। इसे लेकर उद्योगपतियों की बैठक का आयोजन करने की तैयारी चल रही है। औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति अचानक बंद हो जाने के कारण पूरे औद्योगिक अंचल में चिंता का माहौल है।