
रायपुर . अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मोतियाबिंद ऑपरेशन में बरती गई लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इनमें से एक मरीज की आंख का तीन ऑपरेशन करने के बावजूद स्थिति नाजुक बनी हुई है। रामकृष्ण नामक मरीज की आंखों में ज्यादा इंफेक्शन होने के कारण तीन बार ऑपरेशन किया गया है। इसमें से दो ऑपरेशन एम्स और तीसरा ऑपरेशन एमजीएम आई हॉस्पिटल में किया गया।
सूत्रों के अनुसार मरीज की रेटिना में भी कुछ इंफेक्शन फैला है, जबकि एमजीएम प्रबंधन इस बात को सिरे से खारिज कर रहा है। शेष चार मरीजों की हालत में पिछले दिनों की अपेक्षा सुधार देखा गया है और उनके तीन से चार दिनों के भीतर ठीक होने की उम्मीद है। एमजीएम आई हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. दीपशिखा अग्रवाल का कहना है कि लाए गए मरीजों में से एक की स्थिति थोड़ी नाजुक बनी हुई है, जिसे अस्पताल लाते ही इमरजेंसी में ऑपरेट किया गया है, जबकि शेष की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
एम्स प्रबंधन ने मरीजों की हालत बिगड़ते देख परिजनों को 20-25 हजार रुपए की व्यवस्था कर एमजीएम में इलाज कराने के लिए भेज दिया। जबकि, वे 15 से 20 हजार रुपए एम्स में पहले ही खर्च कर चुके हैं। हालांकि एमजीएम प्रबंधन का कहना है कि यदि परिजन सक्षम हों तो ठीक है, अन्यथा उनसे इलाज का पैसा नहीं लिया जाएगा।
एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर ने कहा कि मैं आज ही भोपाल से पहुंचा हूं। कमेटी के गठन की प्रक्रिया अभी चल रही है। जल्द ही कमेटी जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उसी आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।