रायपुर

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के साथ चलेगा संपत्तिकर सुधार अभियान, अब नहीं बचेगी Tax चोरी की गुंजाइश

Chhattisgarh Census 2027: जनगणना 2027 के दौरान छत्तीसगढ़ में संपत्तिकर सुधार अभियान चलाया जाएगा। डोर-टू-डोर सर्वे के जरिए नई संपत्तियों की पहचान, कर रिकॉर्ड अपडेट और कर वसूली मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

3 min read
May 17, 2026
Chhattisgarh Census 2027(photo-patrika)

Chhattisgarh Census 2027: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण “हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना” को नगरीय निकायों के लिए राजस्व सुधार का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जनगणना के दौरान होने वाले डोर-टू-डोर सर्वे का उपयोग संपत्ति कर व्यवस्था को दुरुस्त करने, नई संपत्तियों की पहचान करने और कर वसूली मजबूत करने के लिए किया जाए।

विभाग का मानना है कि वर्तमान में कई निकायों में संपत्ति कर निर्धारण, मांग पंजी और कर संग्रह व्यवस्था में गंभीर त्रुटियां एवं अपूर्णताएं हैं। इन कमियों के कारण निकायों को हर वर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आगामी जनगणना को कर सुधार अभियान के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई गई है।

ये भी पढ़ें

Census Rules Changed: जनगणना में बड़ा बदलाव! अब पति का नाम बताना जरूरी नहीं, महिलाओं के अधिकारों पर बड़ा फैसला

Chhattisgarh Census 2027: घर-घर सर्वे से सामने आएगी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति

जनगणना के दौरान कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक घर और भवन का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। घरों के बाहर नए सेंसस हाउस नंबर अंकित किए जाएंगे और इसी प्रक्रिया में संपत्तियों की वास्तविक संख्या, उपयोग और वर्तमान स्थिति की जानकारी भी जुटाई जाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन भवनों को पहले से संपत्ति आईडी जारी की जा चुकी है, उनका मिलान नए सेंसस नंबरों से किया जाएगा।

इससे रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियां पकड़ने में मदद मिलेगी और डुप्लीकेट या छूट चुकी संपत्तियों की पहचान भी संभव हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार कई क्षेत्रों में भवनों का निर्माण होने के बावजूद वे अब तक कर दायरे में शामिल नहीं हो पाए हैं। जनगणना सर्वे के माध्यम से ऐसे मामलों को चिन्हित कर तत्काल कर निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आवासीय बताकर व्यावसायिक उपयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई

विभाग ने उन संपत्तियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं जिन्हें दस्तावेजों में आवासीय दर्शाया गया है, लेकिन वास्तविकता में उनका उपयोग दुकान, कार्यालय, क्लीनिक, कोचिंग संस्थान, गोदाम या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। ऐसे मामलों में संपत्ति की उपयोग श्रेणी बदलकर व्यावसायिक या मिश्रित उपयोग श्रेणी में शामिल किया जाएगा और उसी आधार पर नया कर निर्धारण किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की अनियमितताओं के कारण निकायों को लंबे समय से कम कर प्राप्त हो रहा है। संपत्ति कर विभाग अब सर्वे टीमों से यह सुनिश्चित कराएगा कि प्रत्येक भवन का वास्तविक उपयोग दर्ज किया जाए ताकि कर निर्धारण में पारदर्शिता लाई जा सके।

नए निर्माण और खाली भूखंड भी आएंगे कर दायरे में

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहरों और कस्बों में स्थित प्रत्येक कर योग्य भवन और भूमि का सही एवं विधिवत कर निर्धारण सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा है कि जनगणना के दौरान किए जाने वाले सर्वे में उन संपत्तियों को विशेष रूप से चिन्हित किया जाए जो अब तक कर रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाई हैं।

इसमें नए निर्मित भवन, नियमितीकरण के बाद बने मकान, स्वामित्व परिवर्तन वाले भवन, खाली भूखंड तथा बिना अनुमति विकसित की गई संपत्तियां शामिल हैं। विभाग का मानना है कि इन संपत्तियों को कर दायरे में लाने से नगरीय निकायों के राजस्व में वृद्धि होगी और संपत्ति कर व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकेगी। जनगणना सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों को आधार बनाकर रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा ताकि कोई

झुग्गी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों का होगा विशेष सर्वे

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि झुग्गी बस्तियों, अनौपचारिक कॉलोनियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों का अलग से विशेष सर्वे कराया जाए। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे मकान और संरचनाएं मौजूद हैं जो अब तक कर रिकॉर्ड में शामिल नहीं हैं। डोर-टू-डोर सर्वे के दौरान इन सभी संपत्तियों की जानकारी एकत्र कर उन्हें संपत्ति कर दायरे में लाने की कार्रवाई की जाएगी। इससे निकायों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

बकाया कर वसूली के लिए बनेगी वार्डवार सूची

जनगणना सर्वे के दौरान प्रत्येक संपत्ति की बकाया कर स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर वार्डवार बकायेदारों की सूची तैयार की जाएगी, जिससे वसूली अभियान को तेज किया जा सके। विभाग ने निकायों को निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान प्राप्त आंकड़ों को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाए ताकि कर निर्धारण, भुगतान और वसूली प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

पारदर्शी और सशक्त होगी संपत्तिकर व्यवस्था

विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना के साथ संपत्तिकर सुधार अभियान चलाने से वर्षों से लंबित रिकॉर्ड सुधार का कार्य तेजी से पूरा हो सकेगा। इससे कर चोरी पर रोक लगेगी, वास्तविक संपत्तियों का आंकड़ा सामने आएगा और निकायों की राजस्व क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल कर वसूली बढ़ाना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी, आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम संपत्तिकर प्रणाली विकसित करना है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो सके।

Updated on:
17 May 2026 07:34 am
Published on:
17 May 2026 07:32 am
Also Read
View All