
CG News: ताबीर हुसैन. टेलीस्कोप से चांद-तारों को समझने से शुरू हुआ सफर अब अमरीका की टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी तक पहुंच गया है। मोहगांव, पिपरिया (जिला कबीरधाम) के रहने वाले चंद्र कुमार चंद्रवंशी को यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा इन हंट्सविल (यूएसए) में स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए आमंत्रित किया गया है।
यह अवसर उन्हें पीएचडी के शुरुआत में ही पहली बार विदेश जाने के रूप में मिला है। उन्होंने रविवि, भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग से एमएससी पास की और इसके बाद वर्ष 2025 में पीएचडी में प्रवेश लिया। वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनका परिवार खेती से जुड़ा रहा है और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। वे 31 जनवरी को अमेरिका के लिए रवाना होंगे।
चंद्र तीन महीने अमरीका में रहेंगे। इस दौरान रहने, खाने, आने जाने और ट्रेनिंग से जुड़ा पूरा खर्च भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा। अमरीका में वे इसरो और नासा के सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा पर काम करेंगे। वहां उन्हें एडवांस ट्रेनिंग मिलेगी, जिससे वे सीखेंगे कि इंटरनेशनल लेवल पर डेटा एनालिसिस और रिसर्च कैसे की जाती है।
लौटने के बाद इस अनुभव का उपयोग वे अपने पीएचडी वर्क में करेंगे, जिससे उनका शोध और अधिक मजबूत होगा। फिलहाल चंद्र एक्स रे बाइनरी स्टार्स पर रिसर्च कर रहे हैं, जिसमें ब्लैक होल, पल्सर और न्यूट्रॉन स्टार्स जैसे कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट शामिल हैं। यह हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स का बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। इस ट्रेनिंग के बाद उन्हें भविष्य में दोबारा इंटरनेशनल रिसर्च के अवसर मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
रविवि, प्रोफेसर प्रो. एनके चक्रधारी ने बताया कि पीएचडी के दौरान आमतौर पर छात्रों को विदेश में ट्रेनिंग या रिसर्च का मौका बहुत कम मिलता है। अधिकतर शोधार्थी पूरा काम भारत में ही करते हैं। ऐसे में ग्रामीण परिवेश में पले बढे चंद्र का अमरीका जैसे देश की टॉप यूनिवर्सिटी में चयन होना विशेष उपलब्धि है।