
सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)
World Obesity Day: पीलूराम साहू. मोटापे से विभिन्न कैंसर होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। खानपान व जीवनशैली में बदलाव से लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है कि किशोर व युवा भी ओवरवेट हो रहे हैं और आगे चलकर वे मोटापे से ग्रसित हो रहे हैं। जंक फूड, आउटडोर गेम की कमी इसका प्रमुख कारण है। मोटापा न केवल विश्व या देश की, बल्कि प्रदेश की भी समस्या बढ़ती जा रहा है।
मानक वजन से ज्यादा होने पर इसे मोटापे की श्रेणी में माना जाता है। 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस है। इस मौके पर पत्रिका ने विशेषज्ञों से जाना कि आखिर यह स्वास्थ्य का दुश्मन बन रहा है। डॉक्टरों के अनुसार 4 से 8 फीसदी कैंसर का कारण अधिक वजन है। वसा कोशिकाओं की अधिकता शरीर में सूजन, हार्मोन असंतुलन (इंसुलिन व एस्ट्रोजन) व डीएनए क्षति का कारण बनती है। इससे ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, लिवर, पैंक्रियाज, किडनी व गर्भाशय सहित 11 से अधिक प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इंटरनेशनल जर्नल लैंसेट के एक अध्ययन के अनुसार भारत में 70% शहरी आबादी ज़्यादा वज़न वाली है।
डॉक्टरों के अनुसार कोलेस्ट्राल बढ़ने से हार्ट संबंधी बीमारी होती है। वहीं महिलाओं में प्रजनन संबंधी दिक्कत भी हो सकती है। युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज टाइप 2 की समस्या देखी जा रही है। कुछ मामलों में कैंसर का कारण भी बनता है। आंबेडकर अस्पताल, एम्स समेत निजी अस्पतालों में ऐसे काफी केस आ रहे हैं।
मोटापे के मामले में भारत में 4.4 करोड़ महिलाएं मोटापे का शिकार हैं। देश दुनिया में तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर यूएसए व दूसरे नंबर पर चीन है। 2022 में एक आंकड़े के अनुसार भारत में 1.25 करोड़ बच्चे व 2.6 करोड़ पुरुष मोटापे से ग्रसित है। देश में केरल, तमिलनाडु, पंजाब व दिल्ली में मोटापे की दर अधिक है वहीं छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और झारखंड में यह कम है।
(जैसाकि सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व जनरल फिजिशियन डॉ. एसके चंद्रवंशी ने बताया।)
जंक फूड, बदलती लाइफ स्टाइल व मोबाइल एडिक्शन मोटापा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। खासकर बच्चे व युवा जंक फूड से दूर रहें तो हार्ट व हाइपरटेंशन से बच सकते हैं। साइकिलिंग व फिजिकल एक्टीविटी वजन घटाने में कारगर है। पैरेंट्स को भी इस ओर अलर्ट रहने की जरूरत है।
डॉ. कृष्णकांत साहू, सीनियर कार्डियक सर्जन
मोटापे से ग्रस्त लोगों में एक खास तरह के खून के कैंसर (मल्टीपल मायलोमा) के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। एक रिसर्च के अनुसार शरीर में अतिरिक्त वसा कोलोरेक्टल, रजोनिवृत्ति के बाद ब्रेस्ट, गर्भाशय, किडनी व पैंक्रियाज के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
डॉ. विकास गोयल, सीनियर ब्लड कैंसर विशेषज्ञ
Updated on:
4 Mar 2026, 5:10 PM IST
Published on:
4 Mar 2026, 5:08 PM IST
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