
राकेश टेंभुरकर/CG Scam News: ईओडब्ल्यू ने करीब 11000 करोड़ के महादेव सट्टा, शराब, कोयला, डीएमएफ तेंदूपत्ता और कस्टम मिलिंग घोटाले में करीब 200 ठिकानों पर छापे मारे। घोटालों में शामिल 183 आरोपियों के खिलाफ 13 चालान और पूरक चालान पेश किया। महादेव सट्टा के प्रमोटर्स सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल व शुभम सोनी को फरार घोषित किया। राज्य सरकार के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। अन्य प्रकरणों की जांच की जा रही है। प्रकरणों की ईओडब्ल्यू के साथ ईडी भी जांच कर रही है। शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईडी ने फाइनल चालान पेश किया है।
ईओडब्ल्यू ने 6000 करोड़ रुपए से ज्यादा के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप प्रकरण में 2024 में प्राथमिकी दर्ज की। जांच के बाद 2024 में 2 अभियोग पत्र प्रस्तुत किए गए। जिसमें 14 को आरोपी बनाया गया। वहीं उनके 30 ठिकानों में छापे माकर तलाशी ली गई। बाद में राज्य सरकार के आदेश पर प्रकरण को अग्रिम विवेचना के लिए सीबीआई को स्थानांतरित किया गया।
3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में 2024 में प्राथमिक दर्ज कर 3 और 2025 में 5 अभियोग पत्र प्रस्तुत किए गए। जिसमें कुल 51 को आरोपी बनाया गया। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम के पुत्र चैतन्य, राज्य सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया, निलंबित आईएएस निरंजन दास, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के अधिकारी एपी त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अरविंद सिंह और त्रिलोक सिंह ढिल्लन सहित अन्य को आरोपी बनाया गया। उनके 80 स्थानों में तलाशी ली गई।
कोयला घोटाले में 2024 में प्राथमिकी दर्ज कर 2 चालान पेश किए गए। वहीं जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर 2025 में 2 पूरक अभियोग पत्र प्रस्तुत कर 20 को आरोपी बनाया गया। जिनमें निलंबित आईएएस रानू साहू, समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, रजनीकांत तिवारी, वीरेंद्र जायसवाल, संदीप नायक सहित अन्य कथित रूप से वसूली सिंडिकेट का हिस्सा थे। इनके 15 ठिकानों में छापे मारे गए। इस समय प्रकरण की जांच चल रही है।
डीएमएफ घोटाले में आईएएस आइएएस रानू साहू, राज्य सेवा अधिकारी माया वारियर और मनोज कुमार द्विवेदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस समय रानू साहू अंतरिम जमानत पर राज्य से बाहर रह रही है। ईओडब्ल्यू ने 2024 में अपराध दर्ज कर 2025 में 9 के खिलाफ 1 अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। वहीं 23 ठिकानों में छापे मारे। इस समय धारा 173 (8) के तहत प्रकरण विवेचनाधीन है।
CG Scam News: 140 करोड़ रुपए के कस्टम मिलिंग घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी, राइस मिल एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर एवं अन्य को आरोपी बनाया गया। 2024 में अपराध दर्ज कर 2025 में 5 के खिलाफ 3 अभियोग पत्र विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया। इस समय प्रकरण की जांच चल रही है।
ईओडब्ल्यू ने 7 करोड़ रुपए के तेंदूपत्ता घोटाले में सुकमा के पूर्व वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) अशोक पटेल, सुकमा वनमंडल के 3 डिप्टी रेंजर चैतूराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, पोडिय़ामी इडि़मा (हिडमा) वनरक्षक मनीष कुमार बारसे और प्रबंधक-पायम सत्यनारायण उर्फ शत्रु, मो. शरीफ, सीएच. रमना (चिट्टूरी), सुनील नुप्पो, रवि कुमार गुप्ता, आयतू कोरसा एवं मनोज कवासी को आरोपी बनाया गया। 2025 में 13 आरोपियों के 15 ठिकानों में छापे मारे कर 13 के खिलाफ अपराध दर्ज कर चालान पेश किया गया। इस समय प्रकरण धारा 173 (8) के तहत विवेचनाधीन है।
राजस्व निरीक्षक भर्ती घोटाले में रायपुर के सहायक सांख्यिकी अधिकारी वीरेन्द्र जाटव और क्षेत्रीय उप आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय के सहायक सांख्यिकी अधिकारी हेमन्त कौशिक को गिरफ्तार किया। पटवारी से राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा में 2025 में एफआईआर दर्ज करने के बाद 20 स्थानों पर छापे मारकर तलाशी ली गई। बता दें कि 7 जनवरी 2024 में पटवारी से आरआई बनने के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। 90 पदों के लिए 2600 से ज्यादा पटवारी शामिल हुए थे।
29 फरवरी 2024 को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया। इसमें 216 पटवारियों का चयन प्रशिक्षण के लिए हुआ था। हालांकि बाद में 13 लोगों का अंतिम चयन हुआ लेकिन बाद में 22 लोगों का चयन किया गया। इसे लेकर पटवारियों ने आक्रोश जताया। साथ ही लेन-देन कर अपने लोगों को उपकृत करने का आरोप लगाया। परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत को लेकर मामला विधानसभा में उठने पर राज्य सरकार ने इसे जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपा।
घोटाले के आरोपियों के खिलाफ जांच करने के बाद विशेष न्यायाधीश की अदालत में चालान पेश किया गया। घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका को जांच के दायरे में लिया गया - अमरेश मिश्रा, ईओडब्ल्यू एवं एसीबी चीफ
CG Scam News: कोरबा जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से जुड़े कथित 25 करोड़ रुपए के फर्जी हस्तांतरण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारत सरकार के खान मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को इस मामले में प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खान मंत्रालय से 2 दिसंबर 2025 को जारी पत्र के अनुसार, यह मामला वर्ष 2018 का बताया गया है।
आरोप है कि उस समय कोरबा जिले के तत्कालीन कलेक्टर अब्दुल कैसर द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए डीएमएफटी के बैंक खाते से 25 करोड़ रुपए की राशि का फर्जी तरीके से हस्तांतरण कराया गया। यह राशि भारतीय स्टेट बैंक, आईटीआई कॉलोनी, रायपुर स्थित डीएमएफटी खाते से 18 सितंबर 2018 को केंद्रीय पेट्रोसाइंस अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीपेट) के खाते में स्थानांतरित की गई।
मामले में यह भी अहम तथ्य सामने आया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सीपेट द्वारा 20 नवंबर 2024 को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया गया कि 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 की अवधि के दौरान डीएमएफटी कोरबा से सीपेट को किसी भी प्रकार की राशि प्राप्त नहीं हुई। इस जवाब के बाद 25 करोड़ रुपए के कथित ट्रांसफर को लेकर संदेह और गहरा गया है तथा इसे फर्जी खाते में राशि स्थानांतरण का मामला बताया जा रहा है।
भाजपा नेता वकील नरेश गुप्ता ने की थी शिकायत: खान मंत्रालय को यह प्रतिवेदन भाजपा नेता और वकील नरेश गुप्ता द्वारा 9 दिसंबर 2025 को भेजा गया था, जिसमें पूरे प्रकरण को गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए जांच की मांग की गई थी। अब मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।