
Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। राज्य सरकार ने विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक आहूत करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बीच हुई चर्चा के बाद सत्र की अवधि और तिथियों पर सहमति बनी, जिसके बाद राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई है। इसके साथ ही विधानसभा सचिवालय द्वारा सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की कुल पांच बैठकें आयोजित होंगी। इस दौरान सरकार विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सदन में जवाब देगी, वहीं विपक्ष को भी सरकार को घेरने का अवसर मिलेगा। विधानसभा सत्र को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मानसून सत्र भले ही अवधि में छोटा हो, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश के विभिन्न जनहित के मुद्दे, विकास कार्य, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बारिश और बाढ़ से जुड़ी तैयारियां, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय सदन में उठ सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी थी कि मानसून सत्र के दौरान सरकार अनुपूरक बजट पेश कर सकती है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना काफी कम बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार का फोकस फिलहाल विधायी कार्यों और विभिन्न विभागीय विषयों पर रहेगा। हालांकि सत्र के दौरान यदि आवश्यकता महसूस हुई तो सरकार वित्तीय मामलों से जुड़े कुछ प्रस्ताव सदन में ला सकती है, लेकिन अभी तक अनुपूरक बजट को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
मानसून सत्र को लेकर विपक्ष भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल प्रदेश के विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। हाल के महीनों में सामने आए प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को विपक्ष सदन में प्रमुखता से उठा सकता है। वहीं सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों को सदन में रखने की तैयारी में है। ऐसे में पांच दिवसीय सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र भले ही पांच दिनों का हो, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार के लिए यह अपनी नीतियों और योजनाओं को प्रस्तुत करने का अवसर होगा, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की कोशिश करेगा। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लिए जा सकते हैं।