रायपुर

सरकारी बैठकों में अधिकारी-कर्मचारी पहनेंगे खादी वस्त्र, छत्तीसगढ़ में ग्रामोद्योग विभाग का बड़ा फैसला

Chhattisgarh Handloom Industry: छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग विभाग ने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए विभागीय बैठकों और सरकारी आयोजनों में खादी, हथकरघा, कोसा व कॉटन के पारंपरिक वस्त्र पहनने के निर्देश दिए हैं।
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Oct 15, 2026
Chhattisgarh Khadi News
Chhattisgarh Khadi News: अधिकारी-कर्मचारी पहनेंगे खादी वस्त्र(photo-patrika canva create)

Chhattisgarh Khadi News: छत्तीसगढ़ में खादी और हथकरघा से बने वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने नई पहल की है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय बैठकों, शासकीय कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में हाथकरघा, खादी और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा व कॉटन के वस्त्र पहनने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ बुनकरों, कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

Khadi Clothes Mandatory, Handloom Clothes: विभागीय बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों में पहनने होंगे खादी वस्त्र

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह संचालक सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने विभागीय बैठक में इस संबंध में निर्देश जारी किए। इसके तहत विभाग के अधीन आने वाले हाथकरघा, रेशम, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, माटीकला बोर्ड और छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को पारंपरिक वस्त्र पहनने के लिए कहा गया है।निर्देश के अनुसार, विभागीय बैठकों के साथ शासकीय कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में भी हाथकरघा, खादी, कोसा और कॉटन के वस्त्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

हर सप्ताह एक दिन पारंपरिक परिधान अपनाने का सुझाव

राज्य, संभाग, जिला और विकासखंड स्तर के कार्यालयों में भी इस पहल को आगे बढ़ाने की योजना है। इसके तहत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रत्येक सप्ताह एक दिन हाथकरघा और खादी ग्रामोद्योग के परिधान पहनने का सुझाव दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक वस्त्रों को पहचान मिलेगी और इनके उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

बुनकरों और कारीगरों को मिलेगा रोजगार का अवसर

इस पहल से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों को लाभ मिलने की उम्मीद है। खादी, कोसा और कॉटन के वस्त्रों की मांग बढ़ने से स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पादों की बिक्री के नए अवसर मिल सकते हैं।

इसके अलावा, सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को भी काम मिलने की संभावना है। विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कला और पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के साथ उनसे जुड़े लोगों की आजीविका को मजबूत करना है।

स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर

छत्तीसगढ़ अपनी पारंपरिक कोसा और कॉटन वस्त्र कला के लिए जाना जाता है। विभागीय कार्यक्रमों में इन वस्त्रों को अपनाने से स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इस पहल के जरिए खादी और हथकरघा वस्त्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ राज्य की पारंपरिक कला को सम्मान देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Updated on:
15 Oct 2026 01:45 pm
Published on:
15 Oct 2026 01:37 pm