रायपुर

छत्तीसगढ़ में तिलहन फसलों में नया प्रयोग, रायपुर के किसान ऑयल पॉम का कर रहे रोपण

CG News: तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में रायपुर जिले के किसान अब ऑयल पाम की खेती को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।
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Updated: 14 Feb 2026, 12:54 AM IST
CG News: तिलहन उत्पादक कृषकों का पंजीयन शुरू, जानिए पूरी पंजीयन प्रक्रिया

रायपुर। खाद्य विविधता के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने रायपुर जिले के किसान भी जुट गए हैं और इसके लिए ऑयल पॉम का रोपण कर रहे हैं जो प्रधानमंत्री जी के नैशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पॉम के लक्ष्यों के अनुरूप है। तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में रायपुर जिले के किसान अब ऑयल पाम की खेती को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।

केंद्र प्रवर्तित “नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल पाम” योजना की जिले में पहली बार खेती की जा रही है। वर्ष 2025-26 से जिले में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन प्रारंभ हुआ है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।जिले में अब तक 100 हेक्टेयर से अधिक रकबे में ऑयल पाम का रोपण किया जा चुका है। विशेष रूप से विकासखंड आरंग के ग्राम गुजरा में 30 एकड़ भूमि पर ऑयल पाम की खेती कर किसान दीर्घकालिक आय के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

हाल ही में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह एवं जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन ने ग्राम गुजरा पहुंचकर ऑयल पाम रोपण का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। योजना के अंतर्गत किसानों को रोपण हेतु 29 हजार रुपये, रखरखाव के लिए 6,750 रुपये, अंतरवर्ती फसल हेतु 10,250 रुपये, फेंसिंग के लिए 54,485 रुपये, नलकूप खनन एवं पंप स्थापना के लिए 72 हजार रुपये तथा ड्रिप इरीगेशन के लिए 22,765 रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

इससे किसानों को प्रारंभिक निवेश में बड़ी राहत मिल रही है। एफएफबी (फ्रेश फ्रूट बंच) के बीज का विक्रय 20 रू प्रति किलो की दर से किया जाएगा, आरंग में 22 किसान एवं अभनपुर मंे 3 द्वारा कुल 104 हेक्टेयर में जिलें में खेती की जा रही है। ऑयल पाम की विशेषता यह है कि रोपण के लगभग तीन वर्ष बाद उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और 25 से 30 वर्षों तक लगातार उपज प्राप्त होती है।

इससे किसानों को स्थायी और दीर्घकालिक आय का स्रोत उपलब्ध होता है। साथ ही अंतरवर्ती फसल लेने की सुविधा से प्रारंभिक वर्षों में भी आय सुनिश्चित होती है।योजना में न्यूनतम या अधिकतम भूमि की कोई बाध्यता नहीं है और सभी वर्ग के किसान पात्र हैं।

इच्छुक किसान अपने विकासखंड के शासकीय उद्यान रोपणी में आवेदन कर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।ग्राम गुजरा के किसानों ने बताया कि शासन की इस पहल से उन्हें पारंपरिक फसलों के अलावा एक नई और लाभकारी खेती का विकल्प मिला है। उचित मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और अनुदान सहायता के कारण वे आत्मविश्वास के साथ ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल पाम योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि राज्य को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

Updated on:
14 Feb 2026, 12:54 AM IST
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