PMGKAY Scheme Rice: केंद्र सरकार द्वारा 30 मार्च के बाद खरीदी रोकने के आदेश के बावजूद आरोप है कि विभाग स्तर पर अब भी इसकी खरीद जारी है, जिससे पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
PMGKAY Scheme Rice: छत्तीसगढ़ के रायपुर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और केंद्र सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की आपूर्ति को अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश के बावजूद प्रदेश में इसकी खरीदी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
केंद्र सरकार ने 27 फरवरी को आदेश जारी कर 30 मार्च के बाद एफआरके की खरीदी नहीं करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप है कि आदेश के बाद भी विभाग स्तर पर इसकी खरीदी जारी है।
राइस मिलरों का आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर एफआरके खरीदा जा रहा है और इसे गोपनीय रूप से गोदामों में रखा जा रहा है। उनका कहना है कि जब इस पर प्रतिबंध लागू हो चुका है, तो खरीदी के बाद भुगतान किस मद से किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश में करीब 4000 राइस मिलर हैं, जिनमें से 110 एफआरके के लिए पंजीकृत हैं। इनमें भी लगभग 20 मिलरों को ही आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में सीमित मिलरों को फायदा मिलने और बाकी के बाहर होने को लेकर भी असंतोष है।
इस मामले में नान अधिकारियों का कहना है कि खरीदी पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व आदेश के तहत ही राइस मिलरों से निर्धारित मात्रा तय कर सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय मात्रा के अनुरूप चावल लिया जाएगा।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 30 मार्च तक 15 से 16 लाख टन चावल खरीदी का लक्ष्य था, जिसमें से करीब 9 लाख टन की खरीदी की जा चुकी है। शेष 5 से 7 लाख टन की खरीदी भी पूर्व स्वीकृत प्रक्रिया के तहत की जानी प्रस्तावित है। यह खरीदी केवल उन्हीं मिलरों से होगी, जिनके एफआरके सैंपल जांच में पास होंगे। जिनके सैंपल फेल होंगे, उन्हें आपूर्ति की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग का दावा है कि इससे जुड़ी सभी जानकारी 30 मार्च तक पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है।
एफआरके को लेकर विवाद नया नहीं है। जनवरी 2026 में निविदा शर्तों में अचानक बदलाव किए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नई शर्तों के कारण राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक एफआरके मिलर प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) प्रभावित हो सकती है।
एमडी मार्कफेड जितेंद्र शुक्ला ने कहा की विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि एफआरके की खरीदी केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप ही की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नई खरीदी नहीं है, बल्कि पहले से स्वीकृत प्रक्रिया के तहत सैंपल जांच के बाद तय मात्रा में ही एफआरके लिया जा रहा है। संबंधित सभी विवरण विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।