रायपुर। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज के पीजी एमडीएस व इंटर्न छात्र स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हफ्तेभर से परिसर में धरना दे रहे हैं। वे मेडिकल कॉलेज के छात्रों की तरह स्टायपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस पर सालाना 1.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। शासन ने इस मांग […]
रायपुर। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज के पीजी एमडीएस व इंटर्न छात्र स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हफ्तेभर से परिसर में धरना दे रहे हैं। वे मेडिकल कॉलेज के छात्रों की तरह स्टायपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस पर सालाना 1.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। शासन ने इस मांग को ही अस्वीकार कर दिया है। जानकारों का कहना है कि एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं है। इमरजेंसी जैसी सेवा भी नहीं है। इसलिए शासन ने स्टायपेंड बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
छात्रों की मांग पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पिछले साल 20 दिसंबर को स्टायपेंड बढ़ाने संबंधी पत्र भेजा था। 20 जनवरी को चिकित्सा शिक्षा विभाग की अवर सचिव लवीना पांडेय का पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय को मिला है। इसमें वित्त विभाग द्वारा स्टायपेंड बढ़ाने पर असहमति व्यक्त करने की बात कही गई है। यानी अब शासन स्टायपेंड नहीं बढ़ाने वाला है।
आने वाले बजट में भी इस मामले पर कुछ चर्चा हो तो अलग बात है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि डेंटल कॉलेज में केवल ओपीडी सेवाएं चल रही हैं। ऑपरेशन के लायक मरीजों को आंबेडकर अस्पताल के ओटी में सर्जरी की जाती है। ये भी सप्ताह में दो से तीन। दरअसल मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र 24 घंटे ओपीडी से लेकर वार्ड व ओटी में सेवाएं देते हैं। कई बार वे बिना ब्रेक 36 से 48 घंटे की ड्यूटी करते हैं।
आयुर्वेद व होमियोपैथी के छात्रों को ज्यादा स्टायपेंड
इस पर डेंटल छात्रों का दावा है कि आयुर्वेद या होमियोपैथी कॉलेज में भी इमरजेंसी जैसी कोई सेवा नहीं है, लेकिन उन्हें ज्यादा स्टायपेंड दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के इंटर्न छात्र मरीजों के इलाज से लेकर फाइल बनाने का काम करते हैं। वार्ड में भी ड्यूटी लगाई जाती है। डेंटल कॉलेज के इंटर्न बीडीएस कोर्स पूरा होने के बाद केवल ओपीडी में मरीजों का इलाज करते हैं। अधिकारियों के अनुसार इसलिए शासन ने स्टायपेंड बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
डीएमई कार्यालय से शासन को भेजे गए पत्र में ये जानकारी
क्लास छात्र स्टायपेंड प्रस्तावित अंतर की राशि
पीजी फर्स्ट 21 53550 67500 13950
पीजी सेकंड 22 56700 71450 14750
पीजी फाइनल 16 59200 74600 15400
इंटर्न बीडीएस 85 12600 15900 3300
(कुल वित्तीय भार 1 करोड़ 40 लाख 67 हजार)