
Ganesh Jhanki 2024: गणपति विसर्जन के अवसर पर 19 सितंबर को शहर में 100 से अधिक झांकियों के निकलने की उमीद है। गणेशोत्सव समितियां राजनांदगांव, आरंग व दलदलसिवनी से झांकियां लाकर तैयारियों में जुटी हैं। झांकियों में सृष्टि की रचना से लेकर कुंभकरण वध तक के दृश्य शामिल हैं।
श्रीकृष्ण बाल समाज गणेशोत्सव समिति गोवर्धन चौक पुरानी बस्ती की झांकी में इस बार ’सृष्टि की रचना और अंत’ दिखाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष नितिन यदु ने बताया कि दो जीपों पर आधारित इस झांकी में पहली जीप पर भगवान विष्णु और ब्रह्मा द्वारा सृष्टि निर्माण का दृश्य होगा, जबकि दूसरी जीप पर भगवान शंकर के रूद्र अवतार के साथ मां काली का दर्शन होगा।
शारदा चौक से विसर्जन झांकियों की शुरुआत होगी। यहां हर समिति को विशेष नंबर दिए जाएंगे। झांकियां जयस्तंभ चौक, कोतवाली, सदर बाजार, सत्ती बाजार, कंकाली तालाब, पुरानी बस्ती थाना चौक, लीली चौक, लाखे नगर चौक, सुंदरनगर, महादेव घाट, रिंगरोड चौक होते हुए रायपुरा स्थित महादेव घाट के विसर्जन कुंड तक जाएंगी।
नगर निगम द्वारा बनाए गए विशेष व्यवस्थाओं के तहत क्रेन और रोलिंग मशीन की मदद से विसर्जन को सुव्यवस्थित किया गया। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा महादेवघाट विसर्जन कुंड स्थल की विशेष सफाई भी सुनिश्चित की गई। विसर्जन के दौरान पूजा सामग्री, फूल-माला और अन्य (Ganesh Jhanki 2024) अपशिष्ट को तत्काल हटाया जा रहा है, ताकि स्वच्छता बनी रहे।
कुशालपुर स्मृति गणेशोत्सव समिति की झांकी में गंगा अवतरण और गंगा पूजा को दर्शाया जाएगा। यह झांकी गंगा की महिमा और उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं को श्रद्धालुओं के सामने जीवंत करेगी।
गंजपारा की श्री विनायक गणेशोत्सव समिति इस बार कुंभकरण वध के दृश्य को पेश करेगी। समिति के रोहित रॉय ने बताया कि झांकी का निर्माण दुर्ग में विशेष रूप से किया जा रहा है।
लॉयस क्लब गणेशोत्सव समिति की ओर से अश्वमेघ यज्ञ की झांकी तैयार की गई है। यह झांकी प्राचीन भारतीय यज्ञ परंपरा और उसकी महत्ता को (Ganesh Jhanki 2024) दिखाएगी।
श्रीश्री विनायक गणेशोत्सव समिति रामसागर पारा ने भी अपनी झांकी की खास तैयारी की है। समिति संबलपुर, ओडिशा के प्रसिद्ध दुलदुली बाजा और ओडिशा के नृतक व कीर्तन दल के साथ विसर्जन शोभायात्रा निकालेगी। इसमें श्रीराधा-कृष्ण और गोपियों के महारास को दिखाया जाएगा। समिति के सोनू राजपूत ने बताया कि इस झांकी में ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर भी नजर आएगी।
महादेव घाट स्थित विसर्जन कुंड में 18 घंटों के दौरान 5,595 छोटी और 784 बड़ी मूर्तियों का विसर्जन किया गया