
CM हाउस घेराव मामले में NSUI पर FIR (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Politics: राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास घेराव के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिटी कोतवाली थाने में अज्ञात NSUI कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
बुधवार को छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर NSUI ने मुख्यमंत्री निवास घेराव का ऐलान किया था। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों छात्र-युवा कार्यकर्ताओं ने बूढ़ापारा से रैली निकालकर सीएम हाउस की ओर कूच किया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। आरोप है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।
पुलिस के अनुसार, इस हिंसक झड़प में करीब 10 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों में मोहन ध्रुव, माडवी बुधरा, रमेश कुडियाम, जैनेन्द्र कुमार नाग, भोलेन्द्र ठाकुर, सोमा मडकाम, रामसिंह कवाची, उन्दाम राजू, अनिल भारती और सोयम मुकेश शामिल हैं। मामले में शासकीय कार्य में बाधा, शासकीय कर्मचारियों पर हमला समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
इस प्रदर्शन में NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी शामिल हुए। इसके अलावा देवेंद्र यादव, विकास उपाध्याय, ऐजाज ढेबर, आकाश शर्मा समेत कई कांग्रेस और NSUI नेता मौजूद रहे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
राजनांदगांव जिले के अग्रणी दिग्विजय कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं पदक वितरण समारोह राजनीतिक विवादों में घिर गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सांसद संतोष पांडेय को काला झंडा दिखाने की तैयारी कर रहे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों को पुलिस ने सुबह से ही हिरासत में ले लिया। आठ नेताओं को बसंतपुर थाने में करीब 5 घंटे तक बैठाए रखा गया और कार्यक्रम समाप्ति के बाद छोड़ा गया।
एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव राजा यादव ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन छात्र मंच को राजनीतिक मंच में बदल रहा है। उनका कहना है कि कार्यक्रम में भाजपाइयों को समाजसेवी बताकर बुलाया जाता है, जबकि कांग्रेस से जुड़े जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने से परहेज किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
Published on:
09 May 2026 05:34 pm
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