रायपुर

टीन के पीपे से सीखा तबला बजाना, 30 साल बाद गायकी… आज पद्मश्री मदन

छत्तीसगढ़ से पद्म पुरस्कारों में इस साल सिर्फ एक नाम परिचय- नाम- मदन चौहान उम्र- 74 वर्ष विधा- तबला वादक, कबीर और सूफी गायन, गजल, लोक संगीत और भजन पुरस्कार- राजा चक्रधर सिंह सम्मानपत्रिका ञ्च

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Jan 27, 2020
टीन के पीपे से सीखा तबला बजाना, ३० साल बाद गायकी... आज पद्मश्री मदन
टीन के पीपे से सीखा तबला बजाना, ३० साल बाद गायकी... आज पद्मश्री मदन

रायपुर.राजधानी के राजातालाब निवासी कबीर और सूफी गायक मदन ङ्क्षसह चौहान अब पद्मश्री मदन सिंह चौहान कहलाएंगे। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार को घोषणा की, जिसमें छत्तीसगढ़ से सिर्फ मदन चौहान का नाम है। कभी टीन के पीपे को बजाकर रियाज करने वाले मदन ने तीस बरस तबला ही बजाया। मगर इसके बाद गुरु रत्न चंद वर्मा ने एक दिन कहा- तुम गाया भी करो। इसके बाद से तो जैसे सुर और ताल का ऐसा संगम हुआ कि आज कबीर और सूफी गायिकी में मदन छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि देश में एक जाना-पहचाना नाम बन गए हंै।

पद्मश्री के ऐलान के बाद 'पत्रिकाÓ टीम मदन चौहान के घर पहुंची। जहां जश्न का माहौल था। बधाई देने वालों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। नेता व अफसर पहुंचने लगे थे। इसी बीच उन्होंने कहा- मैं जो कुछ भी हूं, संगीत की साधना की वजह से हूं। आधुनिकता के युग में गुरु-शिष्य परंपरा गुम हो रही है। मुझे इसे बचाना है। हस्तांतरित करना है, ताकि युवा पीढ़ी इसे आगे लेकर जाए। इसलिए वे युवा पीढ़ी को संगीत की शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। कहते हैं कि मैं और गाना चाहता हूं, संगीत ही मेरे साथ जाएगा और कुछ नहीं।-

जिसके पास मां सरस्वती का वरदान वो गरीब नहीं- नौ साल की उम्र से संगीत की साधन करने वाले मदन चौहान कहते हैं कि मैंने गरीबी में गुजारा किया है, मगर संगीत को कभी नहीं छोड़ा है। वे कहते हैं कि जिसके पास सरस्वती मां वरदान है वो दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति है। इसे बस समझने और साधने की जरूरत है।

शेख हुसैन के साथ खूब जमी जोड़ी- छत्तीसगढ़ी लोक गीत शेख हुसैन और मदन चौहान की जोड़ी खूब जमी। इन्होंने लोक गीतों को बुलंदी पर पहुंचा दिया। चना के दार राजा..., मन के मनमोहिनी..., गुल-गुल भजिया खाले..., जैसे प्रसिद्ध गीत दिए हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

तीन बार किया पद्म पुरस्कार के लिए आवेदन- मदन चौहान कहते हैं कि मैं तीन सालों से आवेदन कर रहा हूं। शासन को आवेदन भेजने के साथ-साथ ऑन-लाइन भी किया। थोड़ी देर तो हुई मगर, मैं खुश हूं कि जिस विरासत को मैं अपने कंधे पर उठाकर आगे बढ़ रहा हूं उस कला को पहचान मिली।

Published on:
27 Jan 2020 12:29 pm