CG Ration: खाद्य विभाग ने जांच के बाद समूह के लोगों के विरुद्ध प्रकरण बनाते हुए खाद्यान्न के बदले रिकवरी करना था। लेकिन विभाग ने अबतक ना ही रिकवरी की और ना ही एफआईआर दर्ज कराई है।
CG Ration: उचित मूल्य की दुकानों में लगातार फर्जीवाड़े और गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन विभाग से सुस्त रवैये के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है। यहां तक कि पुराने मामलों में भी विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। खमतराई स्थित वीर शिवाजी वार्ड क्रमांक-16 में स्थित सरकारी उचित मूल्य दुकान आईडी 441001194 में लगभग 19 लाख रुपए के चावल और शक्कर की गड़बड़ी पकड़ी गई थी।
तीन साल बीतने के बाद भी इस दुकान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि इस मामले में खाद्य विभाग ने जांच के बाद समूह के लोगों के विरुद्ध प्रकरण बनाते हुए खाद्यान्न के बदले रिकवरी करना था। लेकिन विभाग ने अबतक ना ही रिकवरी की और ना ही एफआईआर दर्ज कराई है। जबकि इस दुकान को लेकर बार-बार शिकायत भी की गई है, उसके बावजूद इसपर कार्रवाई न करने पर अब मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
पकड़ी गई थी गड़बड़ी
विभाग की वेबसाइट में दर्ज मामले के अनुसार 520.96 क्विंटल चावल और 4 किलो शक्कर गायब मिले। इसके अलावा 103.13 क्विंटल एपीएल चावल कम पाया गया था। इस तरह करीब 19 लाख रुपए के चावल, शक्कर की गड़बड़ी पकड़ी गई थीं। दरअसल दुकान को 2021-22 में निलंबन के बाद छाया सामुदायिक विकास समिति में संलग्न किया गया था। इसके बाद इस दुकान को फिर से 5 अप्रैल 2023 को पुरानी समिति मां कंकाली महिला स्वसहायता समूह में बहाल कर दिया गया। इस बहाली के दौरान दुकान को हस्तांतरण कराने से पहले विभाग के निरीक्षक ने दुकान को आवंटित (स्टॉक) चावल, शक्कर और नमक का भौतिक सत्यापन किया था।
रायपुर के कोटा इलाके में राशन की दो दुकानें, जिसकी आईडी 441001334 व 441001335 है, बिना अनुबंध के संचालित हो रही हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन वेबसाइट में ये दोनों दुकानें गुढ़ियारी महिला शक्ति महिला स्व सहायता समूह के नाम पर दिखा रही हैं। जबकि वर्तमान में इन दोनों दुकानों के संचालन के लिए अलग-अलग दो लोग दावेदारी कर रहे हैं।
इसको लेकर विभाग में शिकायत भी की गई है। विभाग ने दोनों दावेदारों को दस्तावेज लाकर जमा करने को कहा है, लेकिन अभी तक इन्होंने दस्तावेज जमा नहीं किए। ये भी मामला काफी लंबे समय से चल रहा है, उसके बावजूद विभाग की ओर से अबतक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं कि गई है, इसके कारण विभाग पर मिलीभगत के भी आरोप लग रहे।