
भुनेश्वर यादव हत्याकांड में पुलिस ने तीन आरोपी गिरफ्तार किया ( File Photo )
Bhuneshwar yadav Murder: रात बढ़ती रही, कार सडक़ों पर दौड़ती रही और भीतर दोस्ती खूनी दुश्मनी में बदलती रही। मोहल्ले में पानी की समस्या को लेकर शुरू हुई मामूली बहस ने ऐसा हिंसक रूप लिया कि तीन दोस्तों ने अपने ही साथी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। ( Raipur Murder case ) हत्या के बाद आरोपी पूरी रात शव को ठिकाने लगाने की साजिश रचते रहे और आखिरकार महानदी किनारे एक टापू में गड्ढा खोदकर शव दफना दिया। छह दिन बाद मोबाइल कॉल, लोकेशन और पुलिस की सख्त पूछताछ ने इस सनसनीखेज वारदात की परतें खोल दीं।
पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक इंदिरा कॉलोनी निवासी भुनेश्वर यादव (38) 22 मई की रात घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिवार ने पहले रिश्तेदारों और दोस्तों से संपर्क किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे परिवार की चिंता बढऩे लगी। कई दिनों तक तलाश के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तब 28 मई को उनकी पत्नी ने मंदिर हसौद थाना पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई।
मामले की जांच शुरू होते ही पुलिस ने भुनेश्वर यादव के मोबाइल कॉल डिटेल और उनके अंतिम संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की। पूछताछ के दौरान पत्नी ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात उनकी पति से मोबाइल पर आखिरी बार बातचीत हुई थी। उस दौरान फोन पर उनके दोस्तों नोहर दास रात्रे, अमित सिंह राजपूत और हेमचंद बंजारे की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। पुलिस की शक की सुई घूमी। यही जानकारी जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुई।
पुलिस ने तीनों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में आरोपी लगातार बयान बदलते रहे, लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल के तकनीकी साक्ष्य सामने रखे, तो वे टूट गए। सख्ती और मनोवैज्ञानिक तरीके से हुई पूछताछ में आरोपियों ने हत्या करना स्वीकार कर लिया। जांच में सामने आया कि घटना की रात सभी आरोपी और मृतक नांदगांव क्षेत्र में मौजूद थे। मृतक का परिवार छह दिन तक परेशान रहा। हत्या का मामला बेनकाब होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि 22 मई की रात पार्षद नोहर दास रात्रे अपनी कार क्रमांक सीजी 04 पीएच 9996 से दोस्तों के साथ नांदगांव की ओर जा रहा था। कार में सभी दोस्त शराब पी रहे थे और रास्तेभर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान मोहल्ले में पानी की समस्या और स्थानीय मुद्दों को लेकर भुनेश्वर यादव तथा पार्षद नोहर रात्रे के बीच बहस शुरू हो गई। पहले यह सामान्य कहासुनी थी, लेकिन शराब के नशे में विवाद अचानक उग्र हो गया।
कार के भीतर दोनों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। बीच-बचाव करने पहुंचे अमित सिंह राजपूत और हेमचंद बंजारे की भी मृतक से झड़प हो गई। इसके बाद तीनों आरोपियों ने मिलकर भुनेश्वर यादव की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। हाथ-मुक्कों और लगातार मारपीट से भुनेश्वर यादव की कार के भीतर ही मौत हो गई। फिर शव को ठिकाने की लगाने की साजिश रचते रहे।
हत्या के बाद आरोपी घबरा गए। पुलिस के अनुसार आरोपी नोहर रात्रे सबसे पहले अपने रिश्तेदार मामा श्रवण जांग के घर पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई। आरोपी रात के अंधेरे में कार से महानदी किनारे पहुंचे और सुनसान टापू तक शव ले गए। वहां गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया गया, ताकि किसी को घटना की भनक न लग सके। आरोपियों को लगा कि शव छिपाने के बाद मामला हमेशा के लिए दब जाएगा, लेकिन पुलिस ने उनकी पूरी साजिश बेनकाब कर दी।
जिस कार में दोस्त साथ बैठकर शराब पार्टी कर रहे थे, वही कार कुछ देर बाद मौत का मैदान बन गई। पुलिस के मुताबिक कार के भीतर हुए विवाद के दौरान आरोपियों ने भुनेश्वर यादव को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी शव को लेकर घंटों इधर-उधर घूमते रहे और फिर महानदी किनारे टापू में दफनाकर लौट आए। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में हडक़ंप मचा दिया है।
भुनेश्वर यादव की गुमशुदगी शुरू में सामान्य लापता व्यक्ति का मामला लग रही थी, लेकिन पत्नी की एक अहम जानकारी ने पूरी जांच की दिशा बदल दी। पत्नी ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात पति से मोबाइल पर आखिरी बातचीत हुई थी और कॉल के दौरान दोस्तों की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। इसके बाद पुलिस ने तीनों दोस्तों की गतिविधियों और मोबाइल लोकेशन की जांच शुरू की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला कि घटना के समय सभी आरोपी नांदगांव क्षेत्र में मौजूद थे। इस कारण हत्या का राज खुल गया।
Updated on:
30 May 2026, 5:11 PM IST
Published on:
30 May 2026, 5:10 PM IST
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