रायपुर

RTE में बड़ी लापरवाही! 6000 से ज्यादा बच्चों का टूटा सपना, 33 जिलों में नहीं भर पाए दाखिले…

RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ के गरीब बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए लागू शिक्षा का अधिकार कानून का प्रदेश में जमीनी हकीकत यह है कि सत्र 2025-26 में 6352 सीटें खाली रह गई।

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Mar 28, 2026
Children advocating for education rights(photo-patrika)

RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ के गरीब बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए लागू शिक्षा का अधिकार कानून का प्रदेश में जमीनी हकीकत यह है कि सत्र 2025-26 में 6352 सीटें खाली रह गई। यानि इतने गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढऩे का मौका नहीं मिल पाया।

सूचना के अधिकार से मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में सैंकड़ों गरीब छात्र शिक्षा के अधिकार से वंचित रह गए, जबकि निजी स्कूलों में सीटें खाली पड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि 33 जिलों में सिर्फ राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान में ही सीटें पूरी भर सकीं, जबकि राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा जैसे बड़े शहरों के निजी स्कूलों में भी स्थिति ठीक नहीं है।

RTE Admission 2026: एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट ने लिखी चिठ्ठी

एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट के अध्यक्ष संजय थुल ने इस मामले पर राज्य सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना आरटीई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इसके संभावित कारणों में आवेदन प्रक्रिया में देरी, जागरुकता की कमी, सत्यापन/लॉटरी प्रक्रिया में समस्याएं, स्कूलों का सहयोग न करना या निगरानी एवं क्रियान्वयन में प्रशासनिक कमियां शामिल हो सकती हैं।

प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा की कई नियमों में फेरबदल की जरूरत है। हमने सरकार से मांग की है कि आरटीई की सीटों में कमी न की जाए। एडमिशन के लिए 2011 के सर्वे सूची मान्य की गई है, जबकि वास्तविक गरीबों की पहचान वर्तमान समय के मुताबिक होनी चाहिए।

इन जिलों में सबसे ज्यादा सीटें खाली

जले का नाम कुल सीट कुल दाखिला कुल रिक्त

  • रायपुर 5198 4687 511
  • बिलासपुर 5203 4611 592
  • दुर्ग 4267 3517 750
  • जांजगीर-चांपा 4521 4074 447
  • कोरबा 2146 1986 160
  • मुंगेली 2129 2025 104
  • रायगढ़ 2145 1839 306
  • सूरजपुर 2418 1834 584
  • सरगुजा 1603 1330 273
  • बलरामपुर 1775 1446 329
  • बस्तर 877 671 206
  • गौरेला-पेड्रा-मरवाही 785 615 170
  • बीजापुर 331 203 128

आदिवासी जिलों में भी सीटें खाली

आंकड़ों पर गौर करें तो बस्तर, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा में भी गरीब बच्चों को शिक्षा के अधिकार कानून के तहत एडमिशन नहीं मिल पाया। आदिवासी क्षेत्रों के कई जिलों के स्कूलों में पर्याप्त आवेदन नहीं मिले, वहीं कई जिलों में स्क्रूटनी में भी बच्चों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सुकमा में 37, दंतेवाड़ा में 21 और नारायणपुर में 13 सीटें खाली रह गई।

Published on:
28 Mar 2026 02:10 pm
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