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Edible Oil Hike: 300 रुपए तक महंगा हुआ खाद्य तेल, प्लास्टिक बोतल व डिस्पोजल के भी दाम बढ़ें

Edible Oil Hike: अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के असर के चलते कई चीजों के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। खाद्य तेल की कीमत प्रति टिन 300 रुपए तक बढ़ गई है..

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प्रति टिन 300 रुपए तक महंगा, डिस्पोजल के दाम भी बढ़े ( File Photo - Patrika )

Edible Oil Hike: ताबीर हुसैन. खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से खाद्य तेल में आग लगी है। गोलबाजार के थोक व्यापारियों के अनुसार पिछले एक सप्ताह में रसोई में उपयोग होने वाले खाद्य तेलों के दाम 140 रुपए से लेकर 300 रुपए प्रति टिन (13 से 15 किलो) तक बढ़ गए हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक बोतल और डिस्पोजल सामग्री भी महंगी हो गई है। डिस्पोजल सामान में प्रति बंडल 5 से 10 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। पहले 15 रुपए में मिलने वाला डिस्पोजल बंडल अब 20 रुपए तक पहुंच गया है।

Edible Oil Hike: क्यों महंगा हो रहा खाद्य तेल

  • भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के रास्ते आता है। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है।
  • समुद्री रास्तों में खतरा बढऩे से माल ढुलाई (फे्रट) महंगी हो गई है।

कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम बढऩे से ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग लागत बढ़ गई है।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के दाम बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर भारत के बाजार पर पड़ रहा है।
  • व्यापारियों द्वारा स्टॉक करने से भी कीमतों में तेजी आई है।

डिस्पोजल महंगा क्यों हो रहा

  • डिस्पोजल और प्लास्टिक बोतल पेट्रोलियम उत्पादों से बनते हैं। कच्चा तेल महंगा होने से प्लास्टिक महंगा हो गया।
  • आयातित प्लास्टिक ग्रेन्यूल के दाम बढ़ गए हैं।
  • ट्रांसपोर्ट लागत बढऩे से थोक कीमतें बढ़ीं।
  • बाजार में स्टॉक सीमित होने से भी रेट बढ़े हैं।

बाजार में लॉकडाउन की अफवाह

इन सबके बीच बाजार में लॉकडाउन की अफवाह भी फैल रही है, जिससे लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने लगे हैं। गोलबाजार की चाय दुकानों में लोग भविष्य को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। लोगों में यह डर बना हुआ है कि अगर हालात बिगड़े तो अचानक लॉकडाउन लग सकता है, इसलिए लोग पहले से स्टॉक करने में जुट गए हैं।

विदेशों से आयात

मार्केट एक्सपर्ट इरफान अहमद ने भारत में खाद्य तेल की खपत ज्यादा है, लेकिन उत्पादन कम। देश में मूंगफली, सरसों, सोयाबीन की खेती होती है, फिर भी जरूरत पूरी नहीं होती। इसलिए भारत को पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल विदेशों से आयात करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर भारत की रसोई पर पड़ता है।