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Chhattisgarh News: रायपुर नगर निगम के टैंकर टेंडर पर घोटाले का आरोप, 2.23 करोड़ के भुगतान पर उठे सवाल

Chhattisgarh News: नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने 2.23 करोड़ रुपये के कथित घोटाले, हर साल एक ही फर्मों को टेंडर देने और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।

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रायपुर नगर निगम में टैंकर घोटाला (photo source- Patrika)

रायपुर नगर निगम में टैंकर घोटाला (photo source- Patrika)

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गर्मी के दौरान वार्डों में पानी सप्लाई के लिए जारी किए गए नगर निगम के टैंकर टेंडर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अधिकारियों-ठेकेदारों की कथित सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए हैं।

Chhattisgarh News: हर साल वही फर्में, उठे सवाल

आकाश तिवारी का कहना है कि नगर निगम हर साल पानी सप्लाई के लिए टेंडर जारी करता है, लेकिन चयन प्रक्रिया पारदर्शी नजर नहीं आती। उनका आरोप है कि पिछले साल जिन 6 फर्मों को काम मिला था, इस साल भी उन्हीं कंपनियों को टेंडर दे दिया गया। उन्होंने जिन फर्मों के नाम लिए, उनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, परिमल कश्यप, अरविंद सिंह ठाकुर, प्रवीण दीक्षित और रफीक अहमद शामिल हैं। तिवारी ने सवाल उठाया कि हर बार इन्हीं नामों का चयन कैसे हो जाता है।

टेंडर शर्तों पर भी संदेह

नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि निविदा की शर्तें भी कथित तौर पर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के हिसाब से बनाई जाती हैं। उनका कहना है कि सभी निविदा दाताओं के रेट और आवेदन की तारीखें एक जैसी होना भी कई सवाल खड़े करता है।

1 करोड़ का टेंडर, भुगतान 2 करोड़ से ज्यादा!

आकाश तिवारी ने दावा किया कि पिछले साल लगभग 1 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बाद में टैंकर संचालन के नाम पर करीब 2.06 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि अगर वास्तविक खर्च इतना था तो इस बार टेंडर राशि उसी आधार पर तय होनी चाहिए थी।

Chhattisgarh News: GPS नहीं, मॉनिटरिंग पर सवाल

टैंकरों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। तिवारी ने कहा कि लंबे समय से टैंकरों में GPS सिस्टम लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। ऐसे में टैंकरों की वास्तविक आवाजाही और पानी सप्लाई की निगरानी मुश्किल हो जाती है।

निष्पक्ष जांच की मांग

आकाश तिवारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत या भ्रष्टाचार साबित होता है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अब इस मुद्दे पर नगर निगम की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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