छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कौशल विकास संस्थान (एनएसटीआई) खोलने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास तेज हो गया है। एनएसटीआई को रायपुर में खोल जाएगा। इसके लिए सड्डू या मोवा में जमीन तलाश की जा रही है। इसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखा है। जमीन का चिह्नांकन होने के बाद आगे […]
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कौशल विकास संस्थान (एनएसटीआई) खोलने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास तेज हो गया है। एनएसटीआई को रायपुर में खोल जाएगा। इसके लिए सड्डू या मोवा में जमीन तलाश की जा रही है। इसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखा है। जमीन का चिह्नांकन होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें कि एनएसटीआई शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से फंड दिया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से 10 एकड़ जमीन की मांग की है। अब तक राज्य सरकार की तरफ से जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सवाल के लिखित उत्तर में दी थी। इस खबर को पत्रिका ने 2 फरवरी के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद अब यह जानकारी निकलकर सामने आईं कि जमीन के लिए कलेक्टर को पत्र भेज दिया गया है।
एनएसटीआई की शुरुआत का उद्देश्य देश में कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना और युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। यह संस्थान ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब देश में बड़ी संख्या में युवा डिग्री तो प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक कौशल के अभाव में रोजगार से वंचित रह जाते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य तकनीकी, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र से जुड़े आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन एनर्जी, हेल्थ केयर, टूरिज्म और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उद्योगों के साथ सीधा तालमेल बनाकर प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ा जाएगा, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी के बेहतर अवसर मिल सकें।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां बड़ी संख्या में युवा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं, उनके लिए यह पहल खास महत्व रखती है। यहां खनिज आधारित उद्योग, बिजली उत्पादन, कृषि, वनोपज प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र में रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं। एनएसटीआई के माध्यम से युवाओं को इन क्षेत्रों से जुड़े आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलेंगे, जिससे वे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि युवाओं का पलायन भी रुकेगा।