गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक घंटे में 30 से ज्यादा सेविंग करने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराने वाले धनंजय श्रीवास से बातचीत के कुछ अंश-
सुनील सुधाकर पाण्डेय@रायपुर. दुनिया में हर वो चीज जो अच्छी दिखती है उसे बनाने के लिए जो लोग काम करते हैं उनका काम सबसे बेहतर होता है। खास कर इंसानो की बात की जाए अगर तो बिना बाल और दाढ़ी कटवाये कैसे दिखेंगे लोग आप अंदाजा लगा लीजिए। ऐसा कहना है गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक घंटे में 30 से ज्यादा सेविंग करने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराने वाले धनंजय श्रीवास का। उनकी इस उपलब्धी पर बात चीत के कुछ अंश।
- आपने ये रिकॉर्ड बनाया कैसे?
इस रिकॉर्ड को बनाने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। क्योंकी किसी रिकॉर्ड मुझे अपने लिए बनाना था वो भी सबसे फस्ट सेविंग बनाने का। उस पर मुसीबत ये थी की कोई रेडी ही नही हो रहा था डर के मारे कहीं नाक कान कट गये रिकॉर्ड के चक्कर में तो। फिर भी सात महीने के प्रयास से 40 से ज्यादा लोगों को कॉंफिडेंस में लिया। उन्होंने मेरे लिए महीनों अपनी दाढिय़ां बढ़ा कर रखी और फिर बम्बई से आए गोल्डन विश्व रिकॉर्ड वालों की टीम के सामने मैने एक घंटे में 32 दाढिय़ां बनाने का कीर्तिमान रच दिया।
- आपको कब लगा कि इस फील्ड में रिकॉर्ड बना सकते हैं?
लगभग 20 साल पहले मैं रायपुर आया था इस काम में अपना करियर बनाने के लिए। मैं शुरू से ही बाल काटना हो या दाढ़ी बनानी हो बहुत तेजी से कैची चलाता था। मेरे दोस्त लोग हमेशा से ही मुझे कहते आए हैं कि इस हुनर पर कुछ बड़ा कर। उन्हीं की बातों से मोटिवेट होकर मैने तैयारी शुरू कि, रजिस्ट्रेशन करवाया और इस मुकाम तक पहुचने में कामयाब हुआ।
- आपने बाल काटने की कला सीखी कहां से?
दरअसल ये मेरा पुस्तैनी काम है। मेरे दादा पर दादाओं भी बाल काटने का काम करते आए हैं। ये हुनर मेरे खुन में है और इसे करते समय मुझे कभी घबराहट नहीं हुई कि कहीं बिगड़ न जाए। 1995 से ही दुकानों में काम करना शुरू कर दिया था मैने। देवेंद्र नगर छोटी रेल्वे लाइन के पास एक सैलून से मैने अपनी शुरुआत की थी और पांच साल तक में लगभग पांच से ज्यादा दुकानो में काम करने के बाद आपनी खुद की दुकान शिवानंद नगर में ओपन की और अब सेटल हूं।
- आप की पहले दिन की कमाई क्या थी?
जब मैने शुरुआत की थी उस दिन की पहली कमाई 150 रुपए थी और अब राजाना 1500 से ज्यादा की कमाई कर लेता हूं। लोगों को नौकरी के लिए भटकता देख अपने ऊपर गर्व महसूस करता हूं की बिना बहुत ज्यादा पढ़े-लिख मैने अपना मुकाम बनाया है।