बस्तर के सुकमा जिले में ‘ऑपरेशन मानसून’ के तहत पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है
जगदलपुर. माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले बस्तर के सुकमा जिले में ‘ऑपरेशन मानसून’ के तहत पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। सुकमा के नुलकातोंग और गोलापल्ली इलाके में हुई मुठभेड़ में एसटीएफ और डीआरजी (डिस्ट्रीक रिजर्व गार्ड) के जवानों ने 15 माओवादियों को मार गिराया। वहीं एरिया कमेटी के सदस्य व पांच लाख का इनामी देवा व महिला माओवादी बुदरी को घायलावस्था में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा माओवादियों को दी गई चेतावनी के 3 दिन बाद जवानों ने की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को माओवादियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि वे समर्पण करें या गोली खाएं।
बस्तर रेंज आइजी विवेकानंद सिन्हा ने संभाग मुख्यालय के पुलिस कोओर्डिनेशन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुखबिर की सूचना पर जवानों की टुकड़ी को भेज्जी और कोंटा से मौके के लिए भेजा गया था। दो दिन की सर्चिंग के बाद सोमवार की सुबह करीब 160 जवानों का दल ६ बजे नुलकातोंग की पहाडि़यों के करीब पहुंचा तो यहां पहले से घात लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया। करीब दो घंटे चली मुठभेड़ के बाद माओवादी भाग खड़े हुए। घटनास्थल की सर्चिंग के दौरान जवानों ने १५ पुरुष माओवादियों के शव, हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद किए।
रायपुर. सुकमा जिले में जवानों को मिली सफलता पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रसन्नता जताई है। केंद्रीय गृहमंत्री ने नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी को फोन कर बधाई देते हुए कहा कि ऑपरेशन सफल रहा। जवानों ने बिना किसी नुकसान के माओवादियों को मार गिराया।
आइजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि यह अब तक की मानसून में सबसे बड़ी सफलता है। इसमें जवानों ने बड़ी बहादुरी से ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही टीम वापस लौटेगी, ऑपरेशन में जवानों के रोल के हिसाब से रिवॉर्ड दिया जाएगा।
आमतौर पर बारिश के मौसम में जगलों में विजिबिलिटी कम हो जाती है, इसलिए ऑपरेशन डिफेंसिव मोड में किए जाते हैं। लेकिन, इस बार पुलिस ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अग्रेसिव मोड में ऑपरेशन चलाने का फैसला लिया। इसकी जानकारी सबसे पहले ‘पत्रिका’ ने अपने पाठकों तक पहुंचाई थी। अब आइजी विवेकानंद सिंह ने भी सोमवार को प्रेसवार्ता में इस पर मुहर लगाते हुए रणनीति में बदलाव की बात स्वीकारी और कहा कि पहले बारिश में डिफेंसिव मोड में काम किया जाता था लेकिन अब आक्रामक तरीके से माओवादी मांद में आपरेशन चलाए जा रहें है। इसमें लगातार सफलता भी मिल रही है।
नुलकातोंग के कोंटा व गोलापल्ली दोनों ही कैंप से जवानों का दल ऑपरेशन के लिए निकला था। दोनों ही जगहों से घटनास्थल की दूरी करीब २० किमी की है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए जवानों को करीब तीन पहाड़ी और दो बड़े नाले पार करने पड़े। मालूम हो कि यह इलाका माओवादियों का लिब्रिटेड जोन माना जाता है।