
ललित यादव का डेयरी तक सफर (Photo Patrika)
CG News: दंतेवाड़ा जिले में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि बस्तर संभाग में एक नई 'श्वेत क्रांति' का संकेत दे रही है। कभी संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है, बल्कि यह पहल स्थानीय स्तर पर कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है।
दंतेवाड़ा के गीदम विकासखंड के ग्राम गुमड़ा के रहने वाले 36 वर्षीय ललित यादव की कहानी अटूट साहस और संघर्ष की मिसाल है। एक समय था जब ललित अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों और निर्माण कार्यों में मजदूरी करने को विवश थे। वर्ष 2013 में उन्होंने महज 6 गायों के साथ पशुपालन की शुरुआत की। आज उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उनके पास 25 गायों का एक विशाल और आधुनिक डेयरी फार्म है।
ललित की सफलता का मुख्य आधार पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश है:
• उन्नत नस्लें: पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने जर्सी और एचएफ (HF) क्रॉस जैसी उन्नत नस्लों को अपनाया।
• उत्पादन: वर्तमान में उनके फार्म से प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो ₹70 प्रति लीटर की दर से बाजार में बिक रहा है।
• लागत में कमी: चारे की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे पशुओं को साल भर पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है और बाहरी खर्चों में भारी कटौती हुई है।
ललित ने केवल डेयरी तक सीमित न रहकर 'मल्टी-फार्मिंग' का एक सफल मॉडल तैयार किया है
• विविधता: डेयरी के साथ-साथ वे कुक्कुट (मुर्गी) पालन और सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है।
• मूल्य संवर्धन (Value Addition): दूध की अधिकता होने पर वे उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करते हैं, जो 400 प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ बिक जाता है।
• जैविक खाद: उनके फार्म के गोबर की इतनी मांग है कि अन्य जिलों के किसान 3000 से 3500 प्रति ट्रैक्टर की दर से जैविक खाद खरीदने उनके घर तक पहुँचते हैं।
ललित की इस प्रगति में शासन की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का विशेष योगदान रहा। उन्होंने डेयरी शेड और फेंसिंग के लिए लिए गए 3 लाख के बैंक ऋण को समय से पूर्व चुकाकर अपनी विश्वसनीयता और व्यावसायिक कुशलता का परिचय दिया है। ललित अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ के संघर्षों और संस्कारों को देते हैं।
उनकी माँ ने एक आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में विपरीत परिस्थितियों में उन्हें शिक्षा दिलाई। आज ललित न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक 'प्रेरक प्रकाश स्तंभ' बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, ईमानदारी और मेहनत से ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
Published on:
28 Apr 2026 07:43 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
