राजधानी को जीरो वेस्ट सिटी बनाने की दिशा में नगर निगम और जिला प्रशासन ने कमर तो कसी लेकिन इसका कोई असर ग्राउंड पर नजर नहीं आ रहा है। बीते महीनों में निगम के उडऩदस्तों ने शहर के थोक बाजारों, विशेषकर डूमरतराई और शास्त्री बाजार में सघन छापे मारे। बावजूद यहां सिंगल यूज प्लास्टिक का […]
राजधानी को जीरो वेस्ट सिटी बनाने की दिशा में नगर निगम और जिला प्रशासन ने कमर तो कसी लेकिन इसका कोई असर ग्राउंड पर नजर नहीं आ रहा है। बीते महीनों में निगम के उडऩदस्तों ने शहर के थोक बाजारों, विशेषकर डूमरतराई और शास्त्री बाजार में सघन छापे मारे। बावजूद यहां सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग जारी है।
छापेमारी या कार्रवाई के कुछ दिनों तक सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम हो जाता है, लेकिन जैसे ही मामला ठंडा होता है, इस्मेताल फिर से शुरू हो जाता है। 30 मार्च को इंटरनेशनल डे ऑफ जीरो वेस्ट मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ उपभोग और उत्पादन पैटर्न को बढ़ावा देना तथा कचरा प्रबंधन के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। यह दिवस हमें संसाधनों के पुनर्चक्रण और शून्य अपशिष्ट के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लडऩे की प्रेरणा देता है।
इस साल की शुरुआत में ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा) ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाने राज्य के सभी नगरीय निकायों को परिपत्र जारी कर सख्त निर्देश दिए थे। निकायों को केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने तथा हर माह की गई कार्रवाई की रिपोर्ट स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 को भेजने कहा गया था। परिपत्र में स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर नागरिकों को सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्पों के बारे में जागरूक करने, बाजारों व सार्वजनिक स्थलों पर अभियान चलाने और आर्थिक दण्ड का प्रावधान लागू करने के निर्देश दिए गए थे।
एक तरफ प्रशासन जीरो वेस्ट डे मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के सब्जी बाजारों की जमीनी हकीकत डराने वाली है। शास्त्री बाजार, टिकरापारा और पंडरी जैसे प्रमुख सब्जी बाजारों में आज भी 50 माइक्रोन से कम वाली प्रतिबंधित पॉलिथीन का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। छोटे विक्रेता औचक निरीक्षण के डर से पॉलिथीन को टोकनियों या बोरियों के नीचे छिपाकर रखते हैं और मांग पर ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। विडंबना यह है कि जागरूक दिखने वाले नागरिक भी थैला साथ लाने के बजाय प्लास्टिक बैग की मांग करते हैं। यह 'लुका-छिपी' का खेल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
साइंस कॉलेज मैदान में चल रहे खेलो इंडिया भी प्लास्टिक से फ्री नहीं हो पाया है। भोजन कक्ष में प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास का उपयोग किया जा रहा है। राजधानी में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को लेकर निगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पांडेय से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और न ही मैसेज का जवाब दिया।