Ayushman Bharat Scheme: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की राशि में बड़ा उछाल देखने को मिला है। पिछले सात वर्षों में कैशलेस इलाज का खर्च 3.37 गुना बढ़कर 693 करोड़ से कई गुना अधिक हो गया है, जिससे आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं।
Ayushman Bharat Scheme: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना (शहीद वीरनारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजना) के तहत बीपीएल-एपीएल मरीजों का बंपर इलाज जारी है। सात साल पहले की तुलना में 3.37 गुना ज्यादा राशि का इलाज किया गया। 2029-20 में 693 करोड़ का इलाज किया गया।
जबकि पिछले साल यानी 2024-25 में 2336.83 करोड़ का इलाज किया गया। तब 16 लाख 64 हजार 660 क्लेम सरकारी व निजी अस्पतालों ने किया। यह 2023-24 की तुलना में 183.83 करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं क्लेम भी 98 हजार 897 ज्यादा रहा। 2023-24 में 2153 करोड़ रुपए का इलाज व 15 लाख 65 हजार 763 क्लेम किया गया था।
2019-20 में क्लेम की संख्या भी महज 8.22 लाख थी। पिछले साल का क्लेम सात साल पहले की तुलना में दोगुना है और भुगतान 3 गुना से ज्यादा। बड़ा सवाल है कि आखिर साल दर साल इतने क्लेम कैसे बढ़ते जा रहे हैं। क्या मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि क्लेम की संख्या दोगुना तक बढ़ गई?
क्या बीमारियां बढ़ गई या एक ही बीमारी के लिए बार-बार क्लेम किया गया? ये ऐसे सवाल है, जिसका जवाब जानना जरूरी है। गौर करने वाली बात ये भी है कि वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 2214 करोड़ का इलाज हो चुका है। क्लेम 14.79 लाख है।
2020-21 में सबसे कम 4 लाख 42 हजार 1113 क्लेम किया गया। इसमें 417 करोड़ रुपए का इलाज किया गया। यह कोरोनाकाल था। पिछले 7 साल में क्लेम व भुगतान में ये सबसे कम है। वहीं, 2021-22 में 8 लाख 48 हजार 216 क्लेम के एवज में 865 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
2025-26 में कुल 2400 करोड़ रुपए से ज्यादा इलाज होने की संभावना है। ये भी पिछले साल की तुलना में 63 करोड़ रुपए से ज्यादा होगा। साल दर साल कैशलेस इलाज की राशि बढऩा कई संदेह को जन्म दे रहा है।
पिछले कई सालों से किसी भी बीमारी का पैकेज नहीं बढ़ा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि इलाज की राशि निरंतर कैसे बढ़ती जा रही है। पत्रिका ने जानकरों से बात की तो पता चला कि इसमें बड़ा गड़बझाला की आशंका है। अगर स्वास्थ्य विभाग क्लेम की बारीकी से जांच करे तो कई गड़बडय़िां सामने आएंगी।
प्रदेश के 1026 सरकारी व 553 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत बीपीएल परिवार का सालाना 5 लाख व एपीएल परिवार का 50 हजार तक सालाना इलाज हो रहा है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि निजी अस्पताल स्थापना खर्च व इंप्लांट महंगा होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा की पिछले दो साल में आयुष्मान भारत योजना में 4551 करोड़ रुपए का कैशलेस इलाज किया गया है। हमारी मंशा है कि योजना के तहत शत-प्रतिशत लोगों का इलाज हो। 90 फीसदी राशन कार्डधारियों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है। योजना में अनियमितता बरतने वाले 34 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।