Raipur News: दही हांडी महोत्सव के मंच पर जब इंडियन आइडल विजेता पवनदीप राजन और गुजरात की प्रसिद्ध लोकगायिका गीता बेन रबारी ने प्रस्तुति दी, तो श्रोताओं ने सुर और भक्ति का संगम महसूस किया।
Raipur News: भारतीय संगीत की दुनिया आज नए प्रयोगों और तकनीक के दौर से गुजर रही है। एक तरफ मंच पर गूंजते लाइव सुर हैं, तो दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई चुनौतियां। राजधानी में आयोजित दही हांडी महोत्सव के मंच पर जब इंडियन आइडल विजेता पवनदीप राजन और गुजरात की प्रसिद्ध लोकगायिका गीता बेन रबारी ने प्रस्तुति दी, तो श्रोताओं ने सुर और भक्ति का संगम महसूस किया।
इस अवसर पर दोनों कलाकारों से हुई बातचीत में उनके सफरर, संगीत से जुड़ी संवेदनाओं और एआई के प्रभाव पर खुलकर बातें हुईं। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल : इंडियन आइडल से अब तक का सफर आपके लिए कैसा रहा?
जवाब: ये सफर मुझे बेहद समृद्ध कर गया। मंच ने मुझे आत्मविश्वास दिया और फैंस ने जीवन का असली अर्थ प्यार और दुआएं।
सवाल : हाल ही में आपकी सेहत को लेकर चर्चा रही, अब कैसे हैं?
जवाब: अब बहुत बेहतर महसूस कर रहा हूं। फैंस की दुआएं और परिवार का सहारा मेरी असली ताकत हैं।
सवाल: एआई से आवाज की नकल होने पर क्या चिंता होती है?
जवाब: मशीन सुर दे सकती है, मगर भावनाएं नहीं। असली संगीत वहीं है जहां दिल से जुड़ाव हो।
सवाल : लोकगायन और भक्ति गीतों में आपकी खास पहचान बनी है। सबसे नजदीक किसको मानती हैं?
जवाब : दोनों ही मेरी आत्मा से जुड़े हैं। लोकगायन में गांव की खुशबू है और भक्ति में मन की शांति।
सवाल : यादगार पल ?
जवाब : जब मेरा पहला गीत रोना सैर मा रे गांव-गांव गाया जाने लगा, वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार था।
सवाल : एआई से लोकगीत या भजन बनने लगे हैं, क्या कहेंगी?
जवाब : गीत मशीन बना सकती है, लेकिन उसमें मिट्टी की खुशबू और भक्ति की सच्चाई नहीं ला सकती।