कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर के कम प्रभावी होने और लोगों के जल्द दुरूस्त होने से आमजनों द्वारा फिर से कोरोना को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
बलौदाबाजार. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर के कम प्रभावी होने और लोगों के जल्द दुरूस्त होने से आमजनों द्वारा फिर से कोरोना को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। जो आने वाले दिनों में घातक साबित हो सकती है। जिला मुख्यालय बलौदा बाजार समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग सहित कोरोना गाइड लाइन के नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया है। वहीं मौसम में बदलाव के बाद अब सर्दी-खांसी के मरीज भी सामने आने लगे हैं जो चिंता की बात है।
जिले में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या के साथ ही साथ शीत ऋतु के आगामी दिनों को चिकित्सकों ने भी कोरोना के लिहाज से गंभीर मानते हुए बेहद सावधानी बरतने की बात कही है। सामान्य सर्दी-खांसी बुखार को ही कोरोना मानकर तत्काल चिकित्सक से परामर्श करने और कोरोना संक्रमण को रोकने में आज भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को ही सर्वाधिक कारगर बताया है।
आज भी मास्क सबसे बढ़ा बचाव
चिकित्सकों ने आज भी कोरोना से बचाव हेतु मास्क तथा सोशल डिस्टेंसिंग को सबसे बड़ा हथियार तथा बचाव माना है। विशेषज्ञों के अनुसार आगामी शीत ऋतु के दौरान सामान्य सर्दी खांसी की वजह से छिंकने से संक्रमण का खतरा और अधिक रह सकता है जिसकी वजह से मास्क और सोशल डिस्टेंसिग ही सबसे बड़ा बचाव है जिसका सभी को अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए।
चिकित्सकों ने बच्चों-बुजुर्गों की विशेष देखरेख की बात कही
चिकित्सकों के अनुसार शीत ऋतु में कोरोना को लेकर बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है। सर्दी और खांसी को सामान्य मौसमी न मानकर तत्काल कोरोना टेस्ट कराकर ईलाज कराना चाहिए। शीत ऋतु के दौरान बच्चों और बुजुर्गों के प्रति विशेष ध्यान रखना चाहिए। आवश्यक न होने पर शाम के बाद घर से बाहर निकलने में परहेज करना चाहिए। यदि बाहर निकलना भी पड़े तो पूरे गर्म कपड़े पहनकर, कान, चेहरे को पूरी तरह से कव्हर कर ही निकलना चाहिए। घर में भी सिगड़ी, हीटर, आग जलाकर गर्म रखना चाहिए। शीत ऋतु के दौरान ठंडे खाद्य पदार्थों को पूरी तरह से त्यागकर गर्म पानी तथा गर्म भोजन ही करना चाहिए।