छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग (Chhattisgarh State Women Commission, ) की अध्यक्ष किरणमयी नायक की अध्यक्षता में जनसुनवाई में एक दिलचस्प मामला (An interesting case) सामने आया जब बच्चों ने अपने पिता से शराब छोडऩे (give up drinking) की गुहार लगाई। इस भावुक अपील के बाद पिता ने महिला आयोग (Women Commission ) के सामने भविष्य में शराब न पीने का वादा किया।
वहीं, आयोग की समझाइश के बाद पति-पत्नी ने एक साथ रहने का फैसला किया। यह मामला बताता है कि कभी-कभी बच्चों की मासूम बातें किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती हैं। आयोग की सहायता से परिवार का टूटने से बचाव हुआ और एक नया राह खुला, जहां प्यार और समझदारी से सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है। महिलाओं से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान सदस्यों में लक्ष्मी वर्मा, सरला कोसरिया, ओजस्वी मण्डावी और दीपिका शोरी उपस्थित थीं।
अन्य मामले में पति-पत्नी ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया। पति ने पत्नी को 3 लाख रुपए की एकमुश्त राशि देने और दहेज का सामान लौटाने की सहमति दी। आयोग ने इस समझौते को मान्यता दी और तलाक की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए निर्देशित किया। एक महिला ने शिकायत की कि उसकी बेटी की शादी के दो महीने बाद ही उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन बेटी के ससुराल पक्ष ने अब तक उसके दहेज का सामान नहीं लौटाया। आयोग की कड़ी समझाइश के बाद पति ने मृतका के माता-पिता को दहेज लौटाने पर सहमति जताई।
एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने छह वर्षों तक उसका शारीरिक और आर्थिक शोषण किया। आयोग की पिछली सुनवाई में पति ने 5 लाख रुपए देने की बात मानी थी, लेकिन बाद में वह धमकाने लगा और राशि घटाकर 1 लाख रुपए करने का दबाव बनाने लगा। इस पर आयोग ने महिला को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया और पुलिस को कार्रवाई करने को कहा। आयोग ने एक मामले में पाया कि बिना तलाक लिए पति ने दूसरी शादी कर ली। महिला की शिकायत पर आयोग ने उसे न्यायालय में परिवाद दर्ज करने की सलाह दी, ताकि आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।