- 18 अगस्त को सीएम बघेल प्रचार प्रसार रथ को दिखाएंगे हरी झंडी, 17 अगस्त को निकलेगा टेंडर। - पर्यटन विभाग के अफसरों ने शुरू की मनमानी, खुली पोल तो बच रहे जानकारी देने से।
रायपुर। शासकीय कार्य के बंदरबाट का खेल पर्यटन विभाग में चल रहा है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि पर्यटन मंडल द्वारा पिछले दिनों जारी किए गए 'चलित झांकी' के टेंडर में देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए पर्यटन मंडल ने चलित झांकी का टेंडर निकाला है। यह टेंडर 17 अगस्त की सुबह 11 बजे खुलेगा। 18 अगस्त को चलित झांकी के रथ को सीएम भूपेश बघेल हरी झंडी दिखाएंगे। टेंडर में शिरकत करने वाले कारोबारियों का कहना है, कि इतने कम समय में टेंडर के अनुसार योजनाओं का प्रचार प्रसार करने वाला रथ तैयार नहीं हो सकता है। कारोबारियों की मानें तो विभागीय अधिकारियों ने रायपुर की एक कंपनी को टेंडर देने का ठान लिया है, और टेंडर प्रक्रिया केवल दिखावे के लिए किया जा रहा है।
शर्तों में किया बदलाव
कारोबारियों के अनुसार चहेती कंपनी को लाभ देने के लिए टेंडर की शर्त में विभाग द्वारा बदलाव किया गया है। चलित झॉकी का काम उसकी कंपनी को मिलेगा, जिसका टर्न ओवर 80 लाख रुपए सालाना का हो। कंपनी का आईएसओ (इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर स्टेंडराइजेशन) सर्टिफिकेट जीवित होना चाहिए। आईएसओ सर्टिफिकेट वाली इवेंट कंपनी प्रदेश में एक या दो है। इस शर्त से निविदा में शिरकत करने वाले अन्य निविदाकर्ता परेशान है। निविदाकर्ताओं का कहना है, कि पूर्व में इस तरह होने वाले टेंडरों में आईएसओ शर्त नहीं होती थी।
इन योजनाओं का होगा प्रचार-प्रसार
पर्यटन मंडल द्वारा निकाली जा रही संभागवार झॉकी में प्रदेश के राम वन गमन पथ के स्थलो और गोठान और गोधन न्याय योजना का प्रदर्शन किया जाएगा। इन योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए साउंड सिस्टम, फ्लैक्स, फोटो मॉडल, एलईडी वाल की मदद से ट्रक में झॉकी बनाई जाएगी और 30 दिन तक प्रदेश के संभागों में प्रचार प्रसार होगा। विभागीय जानकारों की मानें तो झॉकी की मियाद 30 दिन बाद बढ़ाई जा सकती है।
झॉकी प्रदर्शनी की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। आप हमारे अकाउंटेंट अफसर मयंक से बात कर ले, वो आपको पूरी जानकारी दें देंगे।
सुनील अवस्थी, जीएम, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल
राज्य सरकार की योजना का प्रचार प्रसार करने के लिए झॉकी रथ बनाया जा रहा है। टेंडर की क्या शर्त और कंडीशन है, इसके बारे में मुझे स्पष्ट जानकारी नहीं है। आप वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर लीजिए। मैं अधिकृत नहीं हूं।
मयंक गुप्ता, अकाउंटेंट, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल