राजनंदगांव

जहां कभी बूंद-बूंद पानी को तरसता था गांव, वहां महिला सरपंच ने 3 साल में लिख दी जल संरक्षण की नई कहानी

Woman Sarpanch: छत्तीसगढ़ के गुंडरदेही गांव में महिला सरपंच उमा सिंह ठाकुर ने तीन साल में जल संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है।
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Updated: 8 Nov 2026, 11:08 AM IST
Water Conservation
बारिश की बूंदों को बनाया गांव की ताकत (Photo Source- AI Generate)

मोहन कुलदीप/Water Conservation: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान भी निकाला जा सकता है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के वनांचल क्षेत्र छुरिया ब्लॉक के गुंडरदेही गांव ने इस बात को सच कर दिखाया है। कभी यह गांव भीषण जल संकट से जूझ रहा था। गर्मी आते ही पेयजल के लिए ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती थीं। हालात ऐसे थे कि 600 से 700 फीट तक बोरवेल खोदने के बाद भी पानी मिलने की गारंटी नहीं थी। लेकिन आज इसी गांव में 70 से 130 फीट की गहराई पर पानी उपलब्ध हो रहा है।

तीन साल के भीतर गांव की बदली तस्वीर के पीछे किसी बड़े प्रोजेक्ट या भारी-भरकम संसाधनों से ज्यादा एक महिला सरपंच का संकल्प, ग्रामीणों की मेहनत और पानी बचाने की वैज्ञानिक सोच है। गांव की सरपंच उमा सिंह ठाकुर ने जल संकट को अपनी सबसे बड़ी चुनौती माना और इसे दूर करने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर 'मिशन जल रक्षा' की शुरुआत की। इस पहल ने न केवल भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद जगाई, बल्कि पूरे गांव को जल संरक्षण की अहमियत भी समझाई।

700 फीट तक बोर कराया, फिर भी नहीं मिली पानी की एक बूंद

गुंडरदेही गांव में जल संकट कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 600 से 700 फीट तक बोरवेल खोदने के बाद भी पानी नहीं मिलता था। गर्मियों में ग्रामीणों को पेयजल के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। सरपंच उमा सिंह ठाकुर के सामने भी यही समस्या थी। करीब तीन साल पहले उन्होंने अपने घर में 700 फीट तक बोरवेल कराया, लेकिन इसके बाद भी पानी की एक बूंद नहीं मिली।

यह अनुभव उनके लिए बेहद निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने इसे केवल अपनी परेशानी मानकर छोड़ने के बजाय पूरे गांव की समस्या का समाधान खोजने का संकल्प लिया। यहीं से गांव को जल संकट से बाहर निकालने की कहानी शुरू हुई। उमा सिंह ने समझा कि केवल नए बोरवेल खोदने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। जरूरत इस बात की है कि बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोका जाए और उसे जमीन के भीतर पहुंचाया जाए।

शुरू हुआ मिशन जल रक्षा, ग्रामीण भी बने बदलाव के भागीदार

जल संकट से निपटने के लिए सरपंच ने पंचायत और ग्रामीणों के साथ मिलकर 'मिशन जल रक्षा' शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य केवल जल संरचनाएं बनाना नहीं था, बल्कि गांव में पानी के प्रबंधन का ऐसा मॉडल तैयार करना था, जिससे बारिश का पानी अधिक से अधिक जमीन में समा सके। इस काम में ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जल संरक्षण के कई कार्यों में लोगों ने श्रमदान किया।

इससे गांव के लोगों में यह समझ विकसित हुई कि पानी की समस्या का समाधान केवल सरकार या पंचायत की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर ग्रामीण की भागीदारी जरूरी है। अभियान के तहत गांव की भौगोलिक स्थिति, जमीन की ढलान और पानी के बहाव को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य बारिश के पानी की रफ्तार कम करना, उसे रोकना और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाना था।

महिला सरपंच ने पूरे गांव के लिए शुरू किया मिशन

13 एकड़ में बनाए कंटूर ट्रेंच, बारिश का पानी अब नहीं बहता बेकार

गुंडरदेही में जल संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कामों में से एक ढलान वाले 13 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच तैयार करना रहा। कंटूर ट्रेंच ऐसी खाइयां होती हैं, जिन्हें जमीन की प्राकृतिक ढलान और समोच्च रेखाओं के अनुसार बनाया जाता है। बारिश के दौरान पहाड़ी या ढलान वाले क्षेत्रों में पानी तेजी से नीचे की ओर बह जाता है। इससे पानी जमीन में पर्याप्त मात्रा में नहीं समा पाता। कंटूर ट्रेंच पानी के बहाव को धीमा करती हैं और उसे कुछ समय तक रोककर जमीन में रिसने का मौका देती हैं। गुंडरदेही में इस तकनीक का इस्तेमाल इसी उद्देश्य से किया गया। इससे बारिश के पानी को गांव में ही रोकने और भूजल रिचार्ज करने में मदद मिली।

गेबियन डैम से थमा पानी का बहाव, जमीन में बढ़ा रिसाव

गांव में बरसाती नालों पर पत्थरों और लोहे की जालियों की मदद से गेबियन चेकडैम बनाए गए। इनका काम बहते पानी की गति को कम करना और उसे रोककर आसपास की जमीन में पानी के रिसाव को बढ़ाना है। बारिश के समय नालों में पानी तेजी से बहकर गांव से बाहर निकल जाता था। गेबियन चेकडैम बनने के बाद पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद मिली। इससे आसपास के क्षेत्र में पानी के ठहराव और जमीन में उसके समाने की संभावना बढ़ी। इस तरह गांव में केवल पानी को रोकने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों को दोबारा रिचार्ज करने पर भी ध्यान दिया गया।

इंजेक्शन वेल से बारिश का पानी पहुंचाया जमीन की गहराई तक

गुंडरदेही के जल प्रबंधन अभियान की एक खास तकनीक इंजेक्शन वेल रही। गांव की डबरियों और परकोलेशन टैंकों में इंजेक्शन वेल तैयार किए गए। इनमें 200 फीट तक केसिंग डालकर बारिश के साफ पानी को जमीन की गहराई तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। दरअसल, सामान्य रूप से बारिश का पानी जमीन की ऊपरी परतों में समाता है। लेकिन इंजेक्शन वेल के माध्यम से पानी को अपेक्षाकृत गहराई तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। इससे भूजल स्रोतों को रिचार्ज करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा गांव के छह बोरवेल में रिचार्ज शाफ्ट भी तैयार किए गए। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य बारिश के पानी को गांव के भीतर ही सुरक्षित रखना और भूजल स्तर को बेहतर बनाना था।

700 फीट से 70-130 फीट तक पहुंचा पानी, बदली गांव की तस्वीर

गुंडरदेही में तीन साल पहले जिस पानी के लिए ग्रामीणों को 600 से 700 फीट तक बोरवेल खुदवाने पड़ते थे, आज वहां 70 से 130 फीट की गहराई पर पानी उपलब्ध हो रहा है। यह बदलाव गांव में किए गए जल संरक्षण के कार्यों और सामूहिक प्रयासों की अहमियत को दिखाता है। इस बदलाव ने ग्रामीणों के सामने पानी को लेकर एक नई उम्मीद पैदा की है। अब गांव में बारिश के पानी को रोकने और भूजल स्रोतों को रिचार्ज करने की जरूरत को लोग पहले से बेहतर समझने लगे हैं। सरपंच उमा सिंह ठाकुर की पहल ने यह संदेश दिया है कि जल संकट का समाधान केवल अधिक बोरवेल खोदने में नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी को बचाने और उसका सही प्रबंधन करने में भी छिपा है।

पानी बचाने के साथ 2600 पौधे लगाकर बढ़ाई हरियाली

गुंडरदेही पंचायत ने जल संरक्षण को केवल पानी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा। गांव में 8 एकड़ क्षेत्र में 2600 से अधिक मिश्रित फलदार पौधे लगाए गए। इन पौधों की देखभाल को भी सामूहिक जिम्मेदारी बनाया गया। पेड़-पौधे पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के साथ मिट्टी के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हरियाली बढ़ने से जमीन की नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह गांव में एक ओर बारिश के पानी को सहेजने का काम किया गया, वहीं दूसरी ओर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बढ़ाने की पहल भी की गई।

अधिकारियों के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के श्रमदान से सफल हुई पहल

इस अभियान को आगे बढ़ाने में पंचायत के साथ ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। छुरिया जनपद पंचायत के सीईओ होरीलाल साहू और तकनीकी सहायक शुभम के मार्गदर्शन में जल संरक्षण के कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। कंटूर ट्रेंच, गेबियन चेकडैम, इंजेक्शन वेल और रिचार्ज शाफ्ट जैसी तकनीकों को गांव की जरूरत के हिसाब से अपनाया गया। वहीं ग्रामीणों के श्रमदान ने इस अभियान को सामूहिक आंदोलन का रूप दिया।

गुंडरदेही बना जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल

गुंडरदेही की कहानी केवल एक गांव में भूजल स्तर में आए बदलाव की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसमें समस्या को स्वीकार करने के बजाय उसका स्थायी समाधान खोजने की कोशिश की गई।एक महिला सरपंच ने अपने घर में 700 फीट तक बोर कराने के बाद भी पानी नहीं मिलने के अनुभव को पूरे गांव के लिए बदलाव की वजह बनाया। उन्होंने ग्रामीणों को साथ जोड़ा, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया और बारिश की हर बूंद को सहेजने की दिशा में काम किया।

आज गुंडरदेही की पहल दूसरे गांवों के लिए भी सीख है। अगर पंचायत का नेतृत्व मजबूत हो, ग्रामीणों की भागीदारी मिले और जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए तो पानी की समस्या से जूझ रहे गांव भी बदलाव की राह पर आगे बढ़ सकते हैं। गुंडरदेही ने साबित किया है कि जल संकट का मुकाबला केवल पानी की तलाश करके नहीं, बल्कि पानी को बचाकर और जमीन में उतारकर भी किया जा सकता है।

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8 Nov 2026, 11:08 AM IST
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