
मनोज व्यास
राजसमंद. जरूरतमंद और बेघर परिवारों को अपना आशियाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुई मुख्यमंत्री जन आवास योजना अब कई सवालों के घेरे में है। राजसमंद में योजना के तहत बने फ्लैटों में रहने वाले लोगों की पड़ताल के दौरान सामने आया कि करीब 120 फ्लैटों में लोग रह रहे हैं, लेकिन इनमें 40 प्रतिशत से अधिक फ्लैटों में आवंटियों के बजाय किराएदार रह रहे हैं। यानी जिन परिवारों को अपना घर देने के लिए फ्लैट आवंटित किए गए, उनमें से कुछ ने खुद रहने के बजाय इन्हें किराए पर दे दिया। योजना स्थल के आसपास बीएड, पॉलिटेक्निक और आईटी कॉलेज के साथ पुलिस लाइन होने से किराए के मकानों की मांग बनी रहती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ आवंटी अपने फ्लैटों से कमाई कर रहे हैं। इस स्थिति ने योजना के मूल उद्देश्य और आवंटन के बाद निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।आवास निर्माण से पहले हुए सर्वे में शहर के 1080 लोगों के पास अपना मकान नहीं होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद 1072 फ्लैट बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। नगर परिषद के अनुसार, इनमें राजसमंद के केवल 68 लोगों को आवंटन हुआ, जबकि शेष आवंटी अन्य जिलों के बताए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पात्रता की जांच किस तरह की गई और आवंटन के बाद फ्लैटों के उपयोग पर निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
करीब 44 करोड़ रुपए की लागत वाला यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। मुख्य कंपनी एनसीसीएफ को करीब 35.08 करोड़ रुपए का भुगतान होने की जानकारी है, जबकि निर्माण करने वाली दूसरी कंपनी करीब 20 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा कर रही है। इसी बीच आवंटियों से फ्लैट के अतिरिक्त क्षेत्रफल के नाम पर 19,488 रुपए जमा कराने का मुद्दा भी सामने आया है। कुछ आवंटियों का कहना है कि उन्हें अतिरिक्त जगह मिली ही नहीं, फिर उनसे यह राशि किस आधार पर ली जा रही है? दूसरी ओर, योजना स्थल पर सीवरेज व्यवस्था अधूरी होने से गंदा पानी जमा होने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में आवंटन, निर्माण, सुविधाओं और निगरानी से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।
पत्रिका- योजना बेघर परिवारों को मकान देने के लिए थी, फिर आवंटित फ्लैट किराए पर कैसे चल रहे हैं?
जवाब- आवंटित मकान लोगों को दे दिए गए हैं। हो सकता है कि कुछ आवंटी बाहर रहते हों, इसलिए उन्होंने मकान किराए पर दे दिए हों।
पत्रिका- जब मकान बेघर लोगों को रहने के लिए दिए गए थे, तो किराए पर देने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
जवाब- हम इसकी जानकारी लेकर संबंधित आवंटियों को नोटिस जारी करेंगे। इसके अलावा नियमानुसार जो कार्रवाई संभव होगी, वह की जाएगी।
पत्रिका- आवंटन के समय पांच हजार से अधिक आवेदन आए थे। क्या आवेदकों के दस्तावेजों और पात्रता की जांच की गई थी?
जवाब- पांच हजार से अधिक आवेदन आए थे और आवेदकों ने शपथ पत्र दिए थे। इतने आवेदनों की जांच कैसे की जाए? फिर भी मामले की जानकारी लेकर जांच की जाएगी।
पत्रिका- आवंटियों से 19,488 रुपए अतिरिक्त क्यों जमा कराए जा रहे हैं?
जवाब- मकानों के निर्माण के दौरान पांच फीट जगह बढ़ गई थी। इसी अतिरिक्त क्षेत्रफल के पैसे लिए जा रहे हैं।
पत्रिका- कुछ आवंटी कह रहे हैं कि उन्हें अतिरिक्त जगह नहीं मिली, फिर पैसे किस आधार पर लिए जा रहे हैं?
जवाब- हो सकता है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं हो। निर्माण के दौरान जगह में बढ़ोतरी हुई थी, इसलिए राशि ली जा रही है।
पत्रिका- योजना स्थल पर सीवरेज का काम अधूरा है और गंदा पानी एक नाली में जमा हो रहा है। इसका समाधान कब होगा?
जवाब- वहां सफाई करवाई जाएगी। मौके पर जाकर समस्या का समाधान करवाने का प्रयास करेंगे।
1080 बेघर चिह्नित: आवास निर्माण से पहले हुए सर्वे में 1080 लोगों के पास अपना मकान नहीं होने की जानकारी सामने आई।
1072 फ्लैट प्रस्तावित: योजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 608 और निम्न आय वर्ग के 464 आवास शामिल हैं।
स्थानीय आवंटी केवल 68: नगर परिषद के अनुसार, 1072 आवासों में राजसमंद के 68 लोगों को आवंटन हुआ, जबकि शेष आवंटी जिले सहित अन्य जगहों के बताए गए।
करीब 44 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट: वर्ष 2017 में शुरू हुए प्रोजेक्ट में मुख्य कंपनी एनसीसीएफ को करीब 35.08 करोड़ रुपए का भुगतान होने की जानकारी है। निर्माण करने वाली दूसरी कंपनी करीब 20 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा कर रही है।
40 प्रतिशत से अधिक फ्लैटों में किराएदार: मौके पर करीब 120 फ्लैटों में रह रहे लोगों के संबंध में की गई पड़ताल में 40 प्रतिशत से अधिक फ्लैटों में किराएदार होने की जानकारी सामने आई।
मुख्यमंत्री जन आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराना था। लेकिन सर्वे में चिह्नित बेघर लोगों और स्थानीय आवंटियों की संख्या में अंतर, आवंटित फ्लैट किराए पर दिए जाने की जानकारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।आवंटन के समय जमा कराए गए शपथ पत्रों और पात्रता की जांच, किराए पर चल रहे फ्लैटों की वास्तविक संख्या तथा अतिरिक्त राशि वसूलने का आधार स्पष्ट होना जरूरी है। इससे यह सामने आ सकेगा कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक कितना पहुंचा और आवंटन के बाद नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसने निभाई। नगर परिषद आयुक्त ने मामले की जानकारी लेकर जांच करने, संबंधित आवंटियों को नोटिस जारी करने और सीवरेज की समस्या के समाधान का प्रयास करने की बात कही है। अब देखना होगा कि इन आश्वासनों के बाद कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।