
Bheem Gram Panchayat Result : ग्राफिक्स फाइल फोटो पत्रिका।
Bheem Gram Panchayat Result : भीम (राजसंमद). पंचायती राज चुनाव के नतीजों ने भीम पंचायत समिति क्षेत्र की गांवों की राजनीति की कई दिलचस्प तस्वीरें सामने ला दी हैं। कहीं दो कार्यकाल से सरपंची संभाल रही महिला प्रत्याशी को मतदाताओं ने सत्ता से बाहर कर दिया तो कहीं पूर्व सरपंचों की बहुओं ने चुनावी मैदान फतह कर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। कुछ पंचायतों में सरपंची की कुर्सी पति-पत्नी के बीच घूमती रही तो कहीं बेटे के बाद मां ने गांव की सरकार की कमान संभाल ली। अजीतगढ़ में तो करीब 20 साल से सरपंची की कमान एक ही दंपती के हाथों में रही है। वहीं नई गठित पंचायतों में पहली बार सरपंच चुने जाने से गांवों की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत हुई है। इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि भीम क्षेत्र में इस बार मुकाबला केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं था, बल्कि राजनीतिक विरासत, महिला आरक्षण, पारिवारिक समीकरण और नए परिसीमन का असर भी नतीजों में खुलकर नजर आया।
ग्राम पंचायत मंडावर में इस बार सरपंची का मुकाबला खासा दिलचस्प रहा। यहां लगातार दो कार्यकाल से सरपंच पद पर काबिज प्यारी रावत को इस बार हार का सामना करना पड़ा। नवनिर्वाचित सरपंच मदन सिंह ने उन्हें शिकस्त देकर जीत दर्ज की। दो बार से पंचायत की कमान संभाल रही प्यारी रावत की हार को मंडावर की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
भीम (राजसंमद) क्षेत्र की कई पंचायतों में पूर्व सरपंच परिवारों की अगली पीढ़ी ने चुनावी मैदान में उतरकर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। ठीकरवास कला ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच राधा देवी की पुत्रवधू ट्विंकल कंवर पत्नी प्रकाश सिंह ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। इसी तरह लसाड़िया ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच डाऊ सिंह की पुत्रवधू कौशल्या सरपंच निर्वाचित हुईं। दोनों पंचायतों में पूर्व सरपंच परिवार की बहुओं ने जीत हासिल कर गांव की राजनीति में अपनी जगह बनाई।
महिला आरक्षण के बाद पुरुष सीट होने पर कई पंचायतों में पूर्व महिला सरपंचों के पति चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल कर पंचायत की कमान अपने हाथों में ले ली। डूंगाजी का गांव में पूर्व सरपंच भूपेंद्र सिंह, निवर्तमान सरपंच कंचन देवी के पति हैं। उन्होंने चुनाव जीतकर एक बार फिर सरपंच पद हासिल किया। अजीतगढ़ में भी पूर्व सरपंच अमर सिंह रावत, निवर्तमान सरपंच सोहनी देवी के पति हैं। अमर सिंह ने इस बार फिर जीत दर्ज की। वहीं थानेटा ग्राम पंचायत में निवर्तमान सरपंच दीक्षा चौहान के पति एवं पूर्व सैनिक मोहन सिंह ने चुनाव जीतकर पत्नी की जगह सरपंच पद संभाल लिया।
सरपंची की राजनीतिक अदला-बदली केवल पति से पत्नी तक ही सीमित नहीं रही। कालादेह ग्राम पंचायत में निवर्तमान सरपंच बलवीर सिंह की पत्नी आशा देवी ने चुनाव जीतकर पंचायत की कमान संभाली। इसी तरह दिवेर ग्राम पंचायत में महिला सीट आरक्षित होने के कारण निवर्तमान सरपंच भंवर सिंह की पत्नी चमनी देवी ने चुनावी जीत दर्ज की और परिवार का राजनीतिक दबदबा कायम रखा।
अजीतगढ़ ग्राम पंचायत की राजनीति में पति-पत्नी की जोड़ी लंबे समय से सक्रिय है। यहां करीब 20 वर्षों से आरक्षण के समीकरण के अनुसार कभी सोहनी देवी तो कभी उनके पति अमर सिंह रावत सरपंच बनते आ रहे हैं। महिला सीट होने पर सोहनी देवी पंचायत की कमान संभालती हैं तो पुरुष सीट होने पर अमर सिंह सरपंच बन जाते हैं। इस बार भी अमर सिंह रावत ने चुनाव जीतकर सरपंच पद हासिल किया है। इस तरह करीब दो दशक से पंचायत की सत्ता की कमान इसी दंपती के हाथों में बनी हुई है।
कुकरखेड़ा ग्राम पंचायत में निवर्तमान सरपंच ख्याली देवी ने एक बार फिर मतदाताओं का विश्वास जीत लिया। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार सरपंच बनने का गौरव हासिल किया। पिछले कार्यकाल के बाद भी मतदाताओं ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद नवसृजित पंचायतों में पहली बार सरपंच पद के लिए चुनाव हुए। डांसरिया ग्राम पंचायत में एडवोकेट देवीसिंह ने जीत दर्ज कर पहले सरपंच बनने का गौरव हासिल किया। वहीं नवसृजित कालेटरा ग्राम पंचायत में भीम पंचायत समिति के पूर्व प्रधान मांगू सिंह की पत्नी नैनू देवी पहली महिला सरपंच निर्वाचित हुईं।
बाघाना ग्राम पंचायत में भी परिवार के भीतर सरपंची की जिम्मेदारी बदलने का दिलचस्प मामला सामने आया। यहां महिला सीट आरक्षित होने के चलते निवर्तमान सरपंच विष्णु मेवाड़ा की मां गीता देवी ने चुनाव मैदान में जीत दर्ज की। बेटे के बाद अब मां पंचायत की सरपंच बनी हैं।
बरजाल ग्राम पंचायत में पूर्व पंचायत समिति सदस्य नरेंद्र सिंह की पत्नी निरमा देवी ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। वहीं कुशलपुरा ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच सुमित्रा देवी पत्नी गोविंद सिंह रावत ने एक बार फिर चुनाव जीतकर सरपंच पद हासिल किया। इन नतीजों में भी पुराने राजनीतिक परिवारों की सक्रियता देखने को मिली।
भीम पंचायत समिति क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के परिवारों की महिलाओं ने भी सरपंच चुनाव में अपनी जीत का परचम लहराया। बरार निवासी सहायक प्रशासनिक अधिकारी देवेंद्र सिंह की पत्नी फूलवंती देवी ने बरार ग्राम पंचायत में लगातार सरपंच रही पंकज चौहान को हराकर जीत दर्ज की। लगातार सरपंच रही प्रत्याशी को मिली इस हार को बरार पंचायत का बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।
Updated on:
31 Oct 2026, 8:16 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 8:16 PM IST
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