जिले में पशुगणना शुरू हो गई है। 57 गांवों में पशुगणना जारी है। आगामी 31 जनवरी तक जिले में 50 प्रतिशत पशुगणना पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पशु गणना सितम्बर माह में शुरू होने वाली थी, लेकिन आईडी और पासवर्ड के अभाव में पशुगणना शुरू नहीं हो पाई थी।
राजसमंद. जिले में पशुगणना आखिर शुरू हो ही गई। आगामी 30 जनवरी तक 50 प्रतिशत पशुगणना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रगणकों की आईडी और पासवर्ड नहीं होने के कारण पशुगणना में देरी हुई है। जबकि 31 दिसम्बर तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। प्रदेश में पांच वर्ष बाद पशुगणना 2024 एक सितबर से शुरू होनी थी। इसके तहत प्रगणकों को पशुपालकों के घर-घर जाकर पशुओं की गणना कर ऑनलाइन इंद्राज किया जाना था। इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से एनिमल सेंसेस नामक सॉफ्टवेयर तैयार करवाया गया। उक्त सॉफ्टवेयर में डाटा इन्द्राज करने के लिए प्रगणक को आईडी और पासवर्ड दिया जाना था, लेकिन मुख्यालय से आईडी और पासवर्ड मिलने में देरी होने के कारण गत दिनों पशुगणना शुरू की गई है। प्रगणक, सुपरवाइजर आदि पशुगणना के दौरान उक्त सॉफ्टेवयर में पशुओं की कैटेगरी के अनुसार उनकी संख्या सहित अन्य जानकारियां इन्द्राज कर रहे हैं। पशुगणना का कार्य 31 दिसम्बर तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब यह मार्च तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2019 में पशुगणना की गई थी, इसमें 11 लाख से अधिक पशु में बताए गए थे।
पशुपालन विभाग के अनुसार पशु गणना के साथ मुर्गे-मुर्गी के साथ लावारिस गौवंश-सांडवंश आदि की जाएगी। इसके साथ ही पालतू गाय, भैंस, बकरी, ऊंट, गधे, श्वान की गणना की जा रही है। साथ ही जिले की सभी गौशालाओं, पोल्ट्री फार्म, स्लोटर हाउस, निजी फार्म हाउस में रहने वाले पशुओं-पक्षियों की गणना की जाएगी। इससे जिले की वास्तविक पशुओं की गणना सामने आ सकेगी।
गत वर्षो में गौवंश के लंपी वायरस की चपेट में आने से सैकडों गौवंश की मौत हो गई थी। हजारों इसकी चपेट में आ गए थे। ऐसे में पशुगणना से गौवंश की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। ऊंटों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। इनके संरक्षण के लिए प्रयास किए जा सकेंगे।
जिले में पशुगणना शुरू हो गई है। प्रगणकों को आईडी और पासवर्ड मिल गए हैं। 31 जनवरी तक 50 प्रतिशत पशुगणना का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।