
Rajasthan Budgey 2026
भीम. राजस्थान सरकार का तीसरा बजट आगामी फरवरी माह में पेश होने वाला है। इस अवसर पर भीम की जनता की नजरें कई उम्मीदों पर टिकी हैं। वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा पेश किए जाने वाले इस बजट में आमजन से सुझाव मांगे गए थे, जिनमें भीम देवगढ़ के नोटिफाईड मगरा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास पर विशेष ध्यान देने की मांग उठी है। भीम की पूर्व पार्षद, एडवोकेट लता सिंघानिया ने अपने सुझावों के माध्यम से बजट में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजे हैं। इन सुझावों में क्षेत्र के सभी वर्गों के विकास, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
भीम में स्थित सावित्रीबाई फुले बालिका छात्रावास और नोटिफाईड मगरा क्षेत्र के बच्चों के लिए उच्च कोचिंग संस्थानों में फीस पुनर्भरण की सुविधा दी जाए। इसमें सिविल सर्विसेज, नीट, आईआईटी, जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी शामिल है। इसके अतिरिक्त, भीम कॉलेज में पीजी कोर्सेस (प्राणी और नवस्पति विज्ञान), स्थाई परिवहन कार्यालय, राजकीय पोलिटेक्निक कॉलेज, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित पूरे मगरा बोर्ड के वार्षिक बजट को 1 हजार करोड़ रुपए करने की मांग की गई है।
मगरा क्षेत्र के पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की गई है। इसके तहत, एक सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी की अध्यक्षता में मगरा क्षेत्र में निवास करने वाली सभी जातियों के दो-दो प्रतिनिधियों वाली एक विशेष कमेटी बनाई जाए। यह कमेटी अगले वर्षों में मगरा क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्थितियों का आंकलन करेगी और राज्य की विभिन्न राजकीय सेवाओं में मगरा क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के लिए तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके साथ ही, इस कमेटी के लिए बजट का प्रावधान भी शामिल किया जाना चाहिए।
सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार और लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक या विधानसभा स्तर पर एक सहायक जन संपर्क अधिकारी का पद सृजित किया जाए। यह अधिकारी सभी श्रेणियों के लाभार्थियों—जैसे पुरुष, महिला, दिव्यांग, वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने वाले नागरिक तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ न्यूनतम 35 किलो अनाज और पूर्व मेट्रिक छात्रवृत्ति जैसे लाभ भी सुनिश्चित करेंगे।
लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, बोर्ड और उपक्रमों में व्यावसायिक डिग्री या डिप्लोमा आवश्यक होने पर न्यूनतम अंक की बाध्यता हटाई जाए। उदाहरण के लिए, बीई, बीटेक, नर्सिंग, पैरामेडिकल, विधि और कंप्यूटर अभियांत्रिकी जैसी डिग्री/डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्री होने पर, भले ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में न्यूनतम अंक न प्राप्त किए हों, भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर दिया जाए।
मगरा क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए मगरा सब-प्लान बनाने की मांग की गई है। इस योजना के तहत क्षेत्र के शैक्षिक विकास, सामाजिक विकास, आर्थिक सशक्तिकरण, उद्योग-धंधे और स्किल्ड जॉब्स की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। लगभग आधी आबादी आजीविका के लिए बड़े शहरों में पलायन कर रही है। इसके साथ ही, कृषि भूमि का न्यूनतम विकास, सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व और सिविल सेवाओं में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी इस सब-प्लान में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
Published on:
25 Jan 2026 12:01 pm

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