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राजस्थान की पैडवुमन भावना पालीवाल ने पीरियड्स पर समाज की सोच बदल दी, शर्मिंदगी से शुरू हुई कहानी ने बदली तस्वीर

Padwoman Bhavna Paliwal: राजसमंद में देवगढ़ उपखंड की रहने वाली भावना पालीवाल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। लेकिन उनकी कहानी किसी मंच से नहीं, बल्कि शर्मिंदगी से शुरू होती है।

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राजस्थान की पैडवुमन भावना पालीवाल, पत्रिका फोटो

Padwoman Bhavna Paliwal: राजसमंद में देवगढ़ उपखंड की रहने वाली भावना पालीवाल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। लेकिन उनकी कहानी किसी मंच से नहीं, बल्कि शर्मिंदगी से शुरू होती है। स्कूल के दिनों में पहली बार पीरियड्स आए। क्लासरूम में खून के दाग, सहेलियों की फुसफुसाहट, शिक्षकों की चुप्पी ऐसा लगा जैसे कोई श्राप लग गया हो, भावना याद करती हैं। हर जगह नियम, पाबंदियां और डर। मन में एक ही सवाल अगर यह प्राकृतिक है, तो इतनी शर्म क्यों? वक़्त बीता, उम्र बढ़ी, लेकिन वह सवाल मन में ही नहीं रहा वह मकसद बन गया।

शादी के बाद जब एक रोती बच्ची ने बदल दी ज़िंदगी की दिशा एक घटना ने भावना के भीतर छिपी आग को आंदोलन बना दिया। एक सरकारी स्कूल में वह बाल विवाह के दुष्परिणामों पर बात कर रही थीं। तभी एक बच्ची रोती हुई आई और डरते हुए बोली दीदी, मैं मर तो नहीं जाऊंगी वजह पहली बार पीरियड्स आए थे। खून देखकर बच्ची डर गई थी। उस पल भावना को अपना बचपन दिख गया तभी तय कर लिया अब यह डर किसी और बच्ची की आंखों में नहीं दिखना चाहिए।

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पीरियड पाठशाला से लेकर हैप्पी टू ब्लीड तक

भावना पालीवाल ने सिर्फ पैड नहीं बांटे, उन्होंने ज्ञान, आत्मविश्वास और स्वाभिमान बांटा। उन्होंने स्त्री स्वाभिमान, पीरियड पाठशाला, रेड डॉट, चुप्पी तोड़ो, मेरी लाडो, हैप्पी टू ब्लीड, अब चलने दो जैसे अभियानों के जरिए माहवारी को फुसफुसाहट से निकालकर खुली बातचीत का विषय बनाया।

भावना साफ शब्दों में कहती हैं मासिक धर्म कोई अपराध नहीं है। जो स्वयं सृष्टि का आधार है, वह अपवित्र कैसे हो सकता है? वह स्कूलों, कॉलेजों, नरेगा कार्यस्थलों, स्वयं सहायता समूहों और गांव की चौपालों तक गईं। खास बात यह रही कि उन्होंने पुरुषों से भी उतनी ही खुलकर बात की, जितनी महिलाओं से। आज कई गांवों में पिता, भाई और पति खुद आगे बढ़कर पैड लाने लगे हैं। यही असली बदलाव है।

ताने मिले, मज़ाक उड़ा, पर कदम नहीं रुके

यह रास्ता आसान नहीं था। कई बार महिलाओं ने ही कहा तुझे क्या पड़ी है? ये तो सदियों से चलता आ रहा है। कुछ उठकर चली गईं, कुछ ने मज़ाक उड़ाया। लेकिन भावना नहीं रुकीं। मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया, और आज वही लोग जो ताने मारते थे, इस मुहिम में मेरे साथ हैं।

मिली रास्ट्रीय स्तर पर नेशनल पहचान

पालीवाल ने मेरा युवा भारत से साथ मिलकर करियर महिला मंडल और करियर संस्थान राजसमन्द नाम से दो संगठन खड़े किए हैं। आज इससे 100 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण पर काम कर रही हैं। 2019-20 में केंद्र सरकार ने इस संगठन को राज्य स्तरीय युवा मंडल पुरस्कार से सम्मानित किया।

हाल ही में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यों के लिए भावना पालीवाल को भारत सरकार राजस्थान यूथ आइकॉन, यूनिसेफ इंडिया, वोडाफोन आइडिया फाउंडेशन, केट इंडिया सहित 100 से अधिक संस्थाएं उनके कार्य को सम्मान दे चुकी हैं।

राजस्थान पत्रिका ने भी उठाया था मामला

राजस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान से जुड़ी उड़ान योजना आज खुद बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। जिस योजना को मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को संक्रमण और बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, वही योजना अब सरकारी उदासीनता का शिकार होकर सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना कभी ग्रामीण इलाकों की महिलाओं और छात्राओं के लिए राहत की सांस थी, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि इसकी मौजूदगी सिर्फ फाइलों और सरकारी दस्तावेजों तक सिमट कर रह गई है।

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