आज का दिन उनके लिए समर्पित है। जिन्होंने खुद को अंधेरे में रखकर दूसरों के जीवन में उजाला लाने का प्रयास किया। जीवनभर रोशनी की किरण बनकर सीख देते रहे।
मधुसूदन शर्मा
राजसमंद. आज का दिन उनके लिए समर्पित है। जिन्होंने खुद को अंधेरे में रखकर दूसरों के जीवन में उजाला लाने का प्रयास किया। जीवनभर रोशनी की किरण बनकर सीख देते रहे। जिन्होंने ज्ञान की थाती दी। जी हां ये वही सिख्श्यत हैं जिन्होंने अपने कर्मक्षेत्र में रहकर युवाओं के भविष्य को संवारने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। ऐसे ही एक शिक्षक मनोज हाड़ा। जिन्होंने खुद के प्रयासों से न केवल विद्यालय के हालातों को बदला बल्कि बेहतर खिलाडि़यों को तैयार कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भेजकर स्कूल का नाम रोशन किया। जानकारी के अनुसार शारीरिक शिक्षक गुमनामी के अंधेरे में रहकर काम करते हैं। इनके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होगी। वे नहीं बल्कि उनके काम बोलते हैं। लवाना के पीएमश्री उप्रावि में कार्यरत शारीरिक शिक्षक मनोज हाड़ा ने विद्यालय के विकास के लिए लाखों रुपए खर्च कर दिए लेकिन कहीं भी इसका जिक्र तक नहीं किया। परदे के पीछे रहकर भविष्य की नींव को संवारने में जुटे हैं। लाखों रुपए खुद की जेब से खर्च करने वाले शारीरिक शिक्षक मनोज हाड़ा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। बस उनकी आंखों में एक ही ललक नजर आती है कि उनके खिलाड़ी स्कूल और गांव का नाम रोशन करे। गौर करने वाली बात ये है कि बच्चों को उपलब्ध कराई जाने वाली खेल सामग्री इनकी ओर से ही उपलब्ध कराई जाती है। हाड़ा 2014 से स्कूल में कार्यरत हैं। इसके बाद स्कूल की स्थिति बदल गई।
शारीरिक शिक्षक खुद फुटबाल के नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं। वे दस से 12 बार संतोष ट्राॅफी खेल चुके हैं। यहां पदक हासिल कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभावों में रहकर तैयारी की। संसाधन नहीं मिलते थे। ऐसे में मन में विचार आया कि जब भी मौका मिला तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को संसाधनों, खेल सामग्रियों के साथ तैयारी करवाएंगे। बस यही भाव उन्हे बच्चों के लिए प्रेरित किया। इसी की बदौलत वे ऐसा करते आ रहे हैं। संस्था प्रधान सोहनलाल कुमावत ने बताया कि विद्यालय की कायाकल्प का श्रेय हाडा को ही जाता है। वे खुद के खर्चे से विद्यालय के साथ- साथ बच्चों को तराशने में कोई कमी नहीं रखते हैं।
शारीरिक शिक्षक का जीवन बच्चों के लिए समर्पित है। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल के पास खुद के पैसे खर्च कर मैदान तैयार करवाया। इसी मैदान पर बच्चों को बेहतर खिलाड़ी के रूप में भी तैयार किया। इनके तैयार किए खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं और पदक जीत रहे हैं।
मनोज हाड़ा ने बताया कि उनके तैयार किए खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जा चुके हैं। इनमें चार खिलाड़ी फुटबाल और दो खिलाड़ी बेडमिंटन के हैं। जिन्होंने विद्यालय का नाम रोशन किया। इसके अलावा 75 बच्चे ऐसे हैं जो फुटबाल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स में राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेकर स्कूल का नाम रोशन किया है। अब हाड़ा ने फुटबाल के लिए छात्राओं को मैदान में उतारा है। जिन्हे वे तैयारी करवा रहे हैं।
- 2018 में सवा लाख रुपए का गेट का निर्माण करवाया
- 12 लाख रुपए की लागत से हॉल का निर्माण करवाया। जहां बालसभा, प्रार्थना आदि संचालित होते हैं।
- स्कूल में सोलर पैनल लगवाया।
- छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक शौचालय का निर्माण कराया।
- विद्यालय परिसर को हरियाली से आच्छादित किया।
- विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगाए।