केलवा एवं तासोल पंचायत क्षेत्र में इन दिनों अवैध बजरी खनन और परिवहन का कारोबार पूरी बेखौफी के साथ जारी है।
केलवा. केलवा एवं तासोल पंचायत क्षेत्र में इन दिनों अवैध बजरी खनन और परिवहन का कारोबार पूरी बेखौफी के साथ जारी है। केलवा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां फर्राटे भरते हुए मुख्य कस्बे, सड़कों और आबादी वाले इलाकों से गुजरती देखी जा रही हैं। लेकिन खान विभाग आंखे मूंदकर बैठा है। विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं कीजा रही है। जिससे बजरी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और किसी तरह का डर नजर नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत तासोल के गांव से होकर गुजरने वाली गोमती नदी और उसके आसपास बने खानों में लंबे समय से अवैध खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार विरोध किया और संबंधित विभागों में शिकायतें भी दीं, लेकिन इसके बावजूद खनन माफिया लगातार बेखौफ होकर अपना काम जारी रखे हुए हैं। आरोप है कि खनन विभाग और प्रशासन की मिलीभगत के चलते बीते करीब छह महीनों से दिन-रात अवैध खनन चल रहा है।
ग्रामीण शांतिलाल, पारसमल, धर्मेश कुमार, रतनलाल और किशनलाल ने बताया कि अवैध खनन स्थलों पर जेसीबी मशीनों से बजरी निकाली जाती है और डंपरों में भरकर पहले से केलवा व आसपास के गांवों तक भेजी जाती है। इस अवैध कारोबार से रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। बताया गया कि प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली करीब तीन हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
अवैध खनन का गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव भी सामने आ रहा है। गोमती नदी और आसपास के खेतों में जगह-जगह 10 से 15 फीट से अधिक गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इससे न केवल खेतों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बजरी के अवैध खनन और परिवहन पर सख्त रोक लगाए जाने के बावजूद क्षेत्र में आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अवैध बजरी परिवहन रोकने के लिए ट्रैक्टरों पर सख्त नियंत्रण किया जाए और अपंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से होने वाले परिवहन को पूरी तरह बंद किया जाए। इसके बावजूद केलवा क्षेत्र में रेत माफिया के ट्रैक्टर आबादी वाले इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे हैं। कई बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी असंतोष है।
अवैध बजरी खनन को लेकर खनिज विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री द्वारा अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। रेत माफिया की मुखबिरी के कारण माइनिंग विभाग की विजिलेंस टीम को पहले ही जानकारी मिल जाती है। यदि दिन में भी अवैध परिवहन हो रहा है तो सामूहिक प्रयास से इसे रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।
ललित बाछडा, खनिज अभियंता द्वितीय, खान विभाग, राजसमंद