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राजसमंद. शहर की सड़कों पर बढ़ता धुआं और उड़ती धूल अब आम दृश्य बन चुके हैं। पहले जहां प्रदूषण के लिए केवल पुराने ऑटो और बसों को जिम्मेदार माना जाता था, वहीं अब नए वाहन भी लापरवाही के कारण हवा को दूषित करने लगे हैं। समय पर सर्विस नहीं होने और बिना पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाण-पत्र के वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है और आमजन की परेशानी बढ़ रही है।
टीवीए चौराहा, कलक्ट्री रोड, राजनगर और भीलवाड़ा हाईवे सहित शहर के अनेक व्यस्त इलाकों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में वाहनों से निकलने वाला धुआं वातावरण में इस कदर फैल जाता है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। कई पुराने वाहन नियमित फिटनेस जांच से नहीं गुजरते, जबकि नए वाहन भी समय पर सर्विस नहीं होने के कारण अधिक धुआं छोड़ रहे हैं। परिणामस्वरूप शहर की हवा दिन-प्रतिदिन अधिक प्रदूषित होती जा रही है।
लगातार बढ़ते धुएं और प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए हालात ज्यादा चिंताजनक बन गए हैं। प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहने से एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टर भी स्वच्छ हवा की कमी को कई स्वास्थ्य समस्याओं की प्रमुख वजह मान रहे हैं।
वाहनों के लिए फिटनेस जांच और पॉल्यूशन प्रमाण-पत्र अनिवार्य होने के बावजूद शहर में इन नियमों का पालन प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा। जांच अभियान सीमित होने और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण बिना फिटनेस और बिना पीयूसी वाले वाहन आसानी से सड़कों पर चल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चे, कामकाजी लोग और बुजुर्ग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। लगातार बढ़ते धुएं ने शहरवासियों की दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों पर असर डालना शुरू कर दिया है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की उम्मीद अब भी अधूरी नजर आ रही है।
Published on:
26 Feb 2026 01:08 pm
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