खारी फीडर के लिए अब 150 करोड़ स्वीकृत, दुगनी होगी चौड़ाई सरकार ने बजट में की घोषणा, पिछले साल तत्कालीन सरकार ने 80 करोड़ किए थे स्वीकृत नंदसमंद से राजसमंद झील में खारी फीडर के माध्यम से होती है पानी की आवक
राजसमंद. राजसमंद झील को भरने वाले खारी फीडऱ को चौड़ा करने के लिए अब राज्य सरकार ने बजट में 150 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इससे फीडर को दुगना चौड़ा किया जाएगा। हालांकि पिछले साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रथम चरण में फीडर को चौड़ा करने के लिए 80 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, लेकिन टेण्डर प्रक्रिया नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया था। नाथद्वारा स्थित बाघेरी का नाका के ओवर फ्लो होने पर पानी नंदसमंद पहुंचता है। वहां से पानी के ओवरफ्लो होने पर खारी फीडर के माध्यम से झील में पानी की आवक होती है। राज्य सरकार की ओर से बजट में उक्त फीडर को चौड़ा करवाने के लिए 150 करोड़ की घोषणा की है। इससे फीडर को दुगना चौड़ा किया जाएगा, जिससे राजसमंद झील में पानी की आवक दुगनी गति से होगी। खारी फीडर का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था जो 1968 में पूरा हुआ था। इस पर करीब 93 लाख रुपए खर्च हुए थे, इसके निर्माण में ग्रामीणों ने जनसहयोग भी किया था। इसके बाद से झील में लगातार इससे पानी की आवक हो रही है। उक्त फीडर का निर्माण कार्य काफी पुराना होने के कारण फीडर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त भी हो गई है। इसके कारण लम्बे समय से फीडर को चौड़ा करने की मांग उठ रही थी।
खारी फीडर को चौड़ा करवाने के लिए पिछले साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रथम चरण में 80 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। आनन-फानन में 79.94 करोड़ रुपए की प्रशासनिक और वित्तिय स्वीकृति जारी की। टेण्डर अपलोड किए गए थे। टेण्डर में सिर्फ एक ठेकेदार के भाग लेने के कारण उसे निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद दुबारा टेण्डर अपलोड किए गए, लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लग गई। भाजपा सरकार बनने के बाद पिछली सरकार के अधिकांश कामों पर अघोषित रोक लगा दी गई थी। उक्त पूरे प्रोजेक्ट पर 137 करोड़ रुपए खर्च होना प्रस्तावित था। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी.जोशी ने इसका शिलान्यास भी कर दिया था।
बजट में कुंभलगढ़ स्थित आगरिया फीडर के पुनरूद्धार के लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार उक्त फीडर का 2007 में टेण्डर किया था। ठेकेदार किसी कारण से काम को बीच में छोडकऱ भाग गया था। इसके बाद दूसरे ठेकेदार ने भी यही किया। इसके पश्चात कई बार टेण्डर करने के प्रयास किए गए, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। उस समय इस पर करीब 1.5 करोड़ रुपए खर्च होने थे। सरकार ने इस बार 5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, जिससे अधूरे कार्य को पूरा करवाया जाएगा।