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आखिर ऐसा क्या हुआ कि राजसमंद विधायक के खिलाफ लगे नारे?, सांसद से बात करने से क्यों किया गया साफ इनकार

धोईंदा निवासी हरिश जोशी की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठते सवालों का केंद्र बन चुका है।

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Harish Joshi Murder Case

राजसमंद. धोईंदा निवासी हरिश जोशी की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठते सवालों का केंद्र बन चुका है। इस घटना को लेकर समाज में व्याप्त आक्रोश दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। बुधवार को इसी गुस्से का उबाल कलक्ट्रेट परिसर में देखने को मिला, जहां सैकड़ों की संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से ही समाज के लोग कलक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। कुछ ही समय में भीड़ इतनी बढ़ गई कि पूरा परिसर नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लापरवाही, दबाव में काम करने और आरोपियों को बचाने के गंभीर आरोप लगाए। लोगों की मांग थी कि इस पूरे मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।

नौकरी, मुआवजा और कार्रवाई की मांग

आक्रोशित समाजजनों ने मृतक हरिश जोशी के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी, दो करोड़ रुपये का मुआवजा और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग रखी। भीड़ का कहना था कि यदि समय रहते पुलिस ने सक्रियता दिखाई होती, तो शायद हरिश जोशी की जान बचाई जा सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने कांकरोली थाने के सहायक उप निरीक्षक जलेसिंह को पुलिस लाइन के लिए लाइन हाजिर कर दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

कलक्टर से बातचीत, लेकिन नहीं बनी सहमति

आक्रो​शित लोगों से धरना स्थल पर आकर लोगों से वार्ता करते जिला कलक्टर अरूण कुमार हसीजा।

प्रदर्शन के बीच जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा स्वयं मौके पर पहुंचे और समाजजनों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और मामले की जांच के लिए केस ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा। अन्य मांगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया। हालांकि, कलक्टर के आश्वासन से प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए। नारेबाजी और तेज हो गई। इसके बाद समाज के लोगों ने एक प्रतिनिधिमंडल गठित किया और अलग से कलक्टर से वार्ता की।

पूर्व विधायक की पहल, लेकिन मुआवजे पर अड़े रहे लोग

शाम को मावली से पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी कलक्ट्रेट पहुंचे और कलक्टर से बातचीत की। वार्ता के बाद कुछ मांगों पर सहमति बनी। मृतक की पत्नी को एक माह के भीतर योग्यता अनुसार संविदा पर नौकरी देने और आठ लाख रुपये की तत्काल सहायता देने का आश्वासन दिया गया। लेकिन प्रदर्शनकारी दो करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। शव की हालत नाजुक होने के चलते लोगों को समझाया गया, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई। उदयपुर में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया और बुधवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रशासन ने 48 घंटे में पूरे मामले की गहन जांच का भरोसा दिलाया।

‘राजसमंद हमारा परिवार’ पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान भरत पालीवाल ने ‘राजसमंद हमारा परिवार’ जैसे अभियानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में राजनीति करने के बजाय ऐसे कैंपेन बंद किए जाएं और अपने नेताओं पर दबाव बनाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने विधायक और सांसद से सीधे हस्तक्षेप की मांग भी रखी। इसी दौरान लोगों ने कहा कि “राजसमंद मेरा परिवार” कहने वाले नेता अब कहां हैं। गुस्से के बीच विधायक दीप्ति माहेश्वरी के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई, जिसने माहौल को और गर्मा दिया।

सांसद से बात करने से इनकार

घटनाक्रम के दौरान सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ का फोन आया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात करने की इच्छा जताई, लेकिन आक्रोशित लोगों ने उनकी बात सुनने से साफ इनकार कर दिया। लोगों का कहना था कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने एक बार फिर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई।

कांकरोली थाना पुलिस पर गंभीर आरोप

कलक्टर से मिले प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हरिश जोशी 30 दिसंबर को मोटरसाइकिल से घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। इसके बाद परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप है कि मोबाइल बंद होने के बावजूद कांकरोली थाना पुलिस न तो उसकी मोटरसाइकिल ढूंढ पाई और न ही इसे जांच का आधार बनाया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि पुलिस ने उलटे परिजनों पर ही सीसीटीवी फुटेज और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने का दबाव बनाया।

आरोपियों को पकड़कर छोड़ने का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने हत्या के आरोपियों को पकड़ा, लेकिन महज एक घंटे के भीतर उन्हें छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि इस हत्या में दो नहीं, बल्कि तीन से चार लोग शामिल हैं। एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया कि पुलिस पीड़ित परिवार के घर से आरोपी की ओर से दिया गया चेक और उसकी फोटोकॉपी अपने साथ ले गई, जिससे यह संदेह गहराता है कि कहीं सबूत मिटाकर आरोपियों को बचाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

सांसद का प्रशासन से संवाद

इधर सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने कलक्टर से बातचीत कर मामले में त्वरित संज्ञान लेने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्ता में शामिल लोगों से भी संवाद किया और मुख्यमंत्री को पुलिस प्रशासन की कथित लापरवाही से अवगत कराने का आश्वासन दिया।

Updated on:
08 Jan 2026 12:03 pm
Published on:
08 Jan 2026 12:02 pm
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