
(पत्रिका ब्यूरो,रांची): प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफएलआई) के जोनल कमांडर कारगिल यादव उर्फ धनेश्वर यादव ने शुक्रवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। कारगिल यादव पर दस लाख रुपए का इनाम घोषित है और रांची समेत पांच जिलों के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज है।
राजधानी रांची में डीआईजी अमोल वेणुकांत होमकर के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले कारगिल यादव ने कहा कि खूंटी के कोचांग गैंगरेप की घटना में नक्सली संगठन का कोई हाथ नहीं है, बल्कि संगठन से निकाले गए टकला उर्फ समद के द्वारा घटना को अंजाम दिया गया। उन्होंने अपने अन्य पुराने साथियों से भी राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाने की अपील की।
इस मौके पर डीआईजी अमोल वेणुकान्त होमकर ने कहा कि मुख्यधारा से गुमराह हुए अन्य नक्सलियों को भी नयी आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटना चाहिए। वहीं रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीस गुप्ता ने कहा कि कालगिल के आत्मसमर्पण से पीएलएफआई कमजोर हुई है।
बताया गया है कि कारगिल यादव ने वर्ष 1999 में नक्सली संगठन ज्वाइन किया था। बाद में पीएलएफआई का सदस्य बन गया। वर्तमान में उसके गतिविधि का क्षेत्र रांची के चान्हो, मांडर, मैकलुस्कीगंज, लोहरदगा के कैरो और सिमडेगा का बानो इलाका था। उसपर लातेहार के बालूमाथ और पलामू के लेस्लीगंज थाने में भी कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2003 में वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था। जेल से छूटने के बाद उसने कुछ साथियों के साथ लोरिक सेना का गठन किया, लेकिन कारगिल को लगा कि वह टीपीसी से अकेले नहीं निपट पाएगा, इसलिए खूंटी के रनिया जंगल में पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप के सामने वह संगठन में शामिल हो गया। बाद में उसे संगठन में जोनल कमांडर बनाया गया।