
स्टेन स्वामी
(पत्रिका ब्यूरो,रांची): सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चाहे प्रधानमंत्री की सुरक्षा का मसला हो या फिर पुणे के भीमा कोरेगांव में अशांति का मामला हो, इन घटनाओं से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ विचार प्रकट करने वालों को टारगेट किया जा रहा रहा है, ताकि सरकार के खिलाफ बोलने वाले को चुप कराया जा सके। स्टेन स्वामी ने कहा कि मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस की टीम उनके घर आई थी, लेकिन उन्हें प्राथमिकी तक नहीं दिखाई। हिन्दी में लिखी एफआईआर अब तक नहीं दी गई। मराठी में सर्च वारंट था। उन्हें हिन्दी में समझाया गया, तब जाकर उन्होंने सर्च में सहयोग किया। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे पुलिस रांची के नामकुम स्थित उनके आवास पहुंची और करीब तीन घंटे की तलाशी के दौरान महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की पुलिस ने उनका लैपटॉप, मोबाइल, सीडी कैसेट, ऑडियो टेप और कुछ दस्तावेज जब्त कर लिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासियों के बीच रहते हैं और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन का विरोध करते हैं। स्टेन स्वामी ने कहा कि सरकार गरीब, पिछड़े तबके के बीच काम करने वाले लोगों को दबा रही है, वे इसका विरोध करते हैं । उन्होंने कहा कि राज्य और पुलिस मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को झूठे केस में फंसा रही है । स्टेन स्वामी ने आरोप लगाया कि पुलिस एक साथ विभिन्न शहरों में अभियान चलाकर गरीब और शोषित लेगों के लिए काम करने वाले सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लक्षित कर रही है । स्टेन स्वामी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग की कि वे इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करे। उन्होंने झूठे मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की और गलत आरोपों में गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करवाने की भी मांग की है ।
Published on:
29 Aug 2018, 9:02 PM IST
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