कोरोना के संकट में बेटियों ने निभाया फर्ज: मां को दिया कांधा और मुखाग्नि
रतलाम। लॉक डाउन पार्ट -2 के दौरान मां की मौत पर दो बेटियों ने न केवल कांधा दिया वरन उन्हें मुखाग्नि देते हुए बेटे का फर्ज अदा किया। शव यात्रा में पांच-सात लोग ही शामिल हुए जिनमें दोनों बहनें भी थी जिन्होंने अपनी मां की अंतिम यात्रा में कांधा दिया।
महावीरनगर निवासी रेखा इसरानी का शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे काफी लंबे समय से बीमार थी और बिस्तर पर ही उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने शुक्रवार की सुबह अंतिम सांस ली। रतलाम में उनकी दो बेटियों नीता और पूनम इरसानी मौजूद थी जबकि एक बेटी रजनी समतानी इंदौर में रहती है। रेखा इसरानी का पौता राहुल इसरानी इस समय नई दिल्ली में रहता है। लॉक डाउन की वजह से न तो बड़ी बेटी पूनम और उसके पति ललित समतानी रतलाम आ सके और न ही पौता नई दिल्ली से रतलाम आ पाया। ऐसे में रतलाम में रहने वाली दोनों बेटियों नीता और पूनम इसरानी ने अपनी माता की अंतिम यात्रा में कांधा दिया और फिर भक्तन की बावड़ी स्थित मुक्तिधाम पर मुखाग्नि देते हुए बेटे का फर्ज अदा किया। उनके अंतिम दर्शन नई दिल्ली में पौते राहुल और इंदौर में बेटी रजनी और उसके पति ललित समतानी ने वाट्सएप कॉलिंग से ऑनलाइन ही किए।
कोरोना कर्मवीरों का सम्मान किया
भारतीय मजदूर संघ की अपील पर भारतीय रेल मजदूर संघ से संबंधित पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद ने कोरोना महामारी में मैदान में रहकर कार्य करने वाले कर्मवीरों का सम्मान किया। परिषद महामंत्री शिवलहरी शर्मा ने बताया कि देश में इस समय स्वास्थ्य कर्मचारी, रेल कर्मचारी, चिकित्सक आदि लगाातर मैदान में रहकर इस लड़ाई को लड़ रहे है। पुलिसबल तैनात है तो अस्पताल मंे नर्स आदि कार्य कर रहे है। जो पुलिसकर्मी शहीद हुए है उनको दो मिनट का मौन रखकर इस दौरान श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान परिषद के प्रशांत पांडे, अनिल उपाध्याय, सुरेश मीणा, बृजेश पांडे, सुजित शर्मा, पुष्पेन्द्र पाराशर आदि उपस्थित रहे।
कर्मचारी व वालेंटियर दे रहे हैं सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग की रैपिड मेडिकल रिस्पांस टीम के सदस्यों ने ग्राम पंचायत के सचिव, सहायक सचिव, नगर सुरक्षा समिति सदस्यों, सर्वे कार्य में लगे शिक्षक, पुलिसकर्मियों तथा स्वास्थ्यकर्मियों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वास्थ्यं परीक्षण किया जा रहा है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम पंचायत बडायला माताजी और सोहनगढ़ आदि क्षेत्रों में बीएमओ डॉ योगेन्द्र गामड़ के मार्गदर्शन में डॉ. प्रीतम कटारा, डॉ. तरुण गर्ग, अनिल मेहता, अशोक पोरवाल, एफडी मेघा निकम ने संबंधित क्षेत्र के पंचायत सचिव, सहायक सचिव, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य एवं पंचायत के अंतर्गत आने वाले कार्यकर्ताओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
सभी कहा बेटियां हो तो इनके जैसी
भले ही लोग लॉकडाउन केकारण इस अंतिम संस्कार में सामिल नहीं हो सके। लेकिन इन दोनों बेटियों के जज्बे को देखने के बाद सभी ने बस यही बात कही। बेटियां हो तो इनकी जैसी। इन दोनों बेटियों ने विकट परिस्थिति में जो हौसला दिखाया है, उसे सभी ने सलाम किया।
विकट समय में पेश की मिसाल
कोरोना महामारी में हर कोई अपनी जान की परवाह कर रहा है। ऐसे में करीबी लोग विकट समय में भी दूरी बनाए हुए। कुछ लोगों ने परिस्थितिवश दूरी बना ली है। परिजन चाहकर भी अपनों के पास नहीं आ पा रहे है। ऐसे विकट समय में इन दोनों बेटियों ने अपनी मां को विधिपूर्वक अंतिम समय में साथ देकर मिसाल कायम की।
साबित किया बेटियां किसी से कम नहीं
आज के जमाने में बेटियां बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। इस बात को साबित करने के लिए कई परीक्षाओं में बेटियां सही साबित हुई है। ऐसा ही उदाहरण रतलाम की बेटियों ने शहर के सामने रखा। जिसमें महामारी के समय विकट समय में जब बेटों का फर्ज निभाना तो उनके कदम पीछे नहीं हटे। बेटों जैसे अंतिम संस्कार की सभी विधियां पूर्ण की।
हर जगह हो रही प्रशंसा
रतलाम में कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए बेटियों ने जो यह सराहनीय कार्य किया है, उसकी चहूं और प्रशंसा की जा रही है।
पौते ने महामारी में ऑनलाइन दर्शन किए
कोरोना महामारी के समय लॉकडाउन से स्थिति ऐसी बनी हुई है, जो जहां है वहीं रूका हुआ है। रेखा इसरानी का निधन का समाचार जब इंदौर में रह रही बेटी और नईदिल्ली में रह रहे पौते को लगी तो उन्होंने आने का प्रयास किया लेकिन रतलाम नहीं आ पाए। ऐसे में उन्होंने वीडियो कॉलिंग करके ऑनलाइन ही अंतिम दर्शन किए।