
फोटो-01- सामूहिक राखी मनाता था शहर का चपडोद का परिवार
फोटो-02- उपजेल में अपने भाइयों को राखी बांधती बहने
जावरा। सावन माह के आखिरी दिन शुक्रवार को जावरा में रक्षाबंधन का पर्व उत्साह, उमंग और आत्मीयता के साथ मनाया गया। सुबह से ही घर-घर त्योहारी चहल-पहल रही। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों के मस्तक पर कुमकुम का तिलक लगाया, आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर उनकी रक्षा का संकल्प दोहराया।
रक्षाबंधन को लेकर बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर बहनों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। यात्री ट्रेनों और बसों में भीड़ दिखाई दी। बाजारों में मिठाइयों और राखियों की दुकानों पर भी दिनभर रौनक रही। घरों में श्रीफल, मिठाई और पूजा की थाली के साथ राखी बांधने का क्रम देर रात तक चलता रहा।
जेल में भी पहुंचा रिश्तों का उजास
नगर की उप जेल में भी रक्षाबंधन पर भावुक माहौल रहा। जेलर देवेंद्र सिंह चंद्रावत ने बताया कि 132 बंदी भाइयों की कलाई पर 286 बहनों ने राखी बांधी। जेल प्रशासन ने छह वर्ष तक के 82 बच्चों को भी परिजनों के साथ अंदर जाने की अनुमति दी। बहनों को राखी, मिठाई और नारियल साथ ले जाने की भी अनुमति दी गई।
नूरजहां ने हिंदू भाई को बांधी राखी
रक्षाबंधन ने जावरा में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी पेश की। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष की पत्नी नूरजहां कडपा प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी अपने हिंदू भाई राजा देवड़ा के घर पहुंचीं और उन्हें राखी बांधी। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आपसी प्रेम, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। जावरा में रक्षाबंधन ने एक बार फिर साबित किया कि रिश्तों की डोर मजहब की सीमाओं से कहीं बड़ी होती है।