
रतलाम। कोरोना के कारण दो साल तक बाधित रही शिक्षा व्यवस्था अब पटरी पर लौटने लगी है। नया शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो चुका है, लेकिन अभिभावकों में चिंता और आक्रोश है। दरअसल निजी स्कूलों ने फीस 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। प्रवेश के नाम पर भी स्कूल संचालक मोटी रकम वसूल कर रहे हैं। किताब और स्टेशनरी के दाम भी 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। बुक सेलर इसके पीछे कागज महंगा होने का तर्क दे रहे हैं, लेकिन एनसीईआरटी की किताबों के रेट पिछले वर्ष के बराबर ही हैं। इन सब के बीच जिला शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हुआ है व शिकायत का इंतजार कर रहा है।
एनसीईआरटी की जो किताब छात्रों को 65 रुपए की मिल रही है प्राइवेट पब्लिशर्स की वही किताब 800 रुपए तक की पालक को पढ़ रही है। कुछ निजी स्कूलों ने बिना बताए फीस बढ़ा दी है। स्कूल सामग्री स ेलेक किताबें भी 40 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। पढ़ाई के नाम पर निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। इसके बाद भी जिला शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।
सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई 4 अप्रेल से शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधन किताबें, कॉपियां, जूते, स्कूल ड्रेस समेत कई जरूरी सामान एक ही दुकान से खरीदने का दबाव बना रहे हैं, इससे अभिभावक परेशान हैं। अभिभावकों की परेशानी ये है कि उनको बच्चों को स्कूल में पढ़ाना है, इसलिए वे खुलकर कुछ बोलने से कतराते है। गत वर्ष कलेक्टर ने इस मामले में शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी की थी, इस साल बो फिलहाल बंद है।
इस तरह समझें इसको
एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सोशल स्टडी की किताब की कीमत 65 रुपए हैं, वहीं प्राइवेट पब्लिसर्स की यह किताब 500 से 800 रुपए में उपलब्ध है। एनसीईआरटी की कम्प्यूटर की जो किताब 80 रुपए की है, प्राइवेट पब्लिसर्स की वही किताब 500 रुपए की है। किसी भी स्कूल की वर्कबुक 500 से कम की नहीं है, जबकि कीमत सामान्य तौर पर 30 से 40 रुपए रहती है। इसी तरह ड्राइंग बुक्स की कीमत भी 100 से 200 रुपए है।
सामान की दर
2022- 2023
बड़ा रबर 10- 20
पेंसिल बॉक्स 60- 80
पेंसिल कटर 8 -15
स्केच पैन 60 -80
मार्कर पैन 55 -80
औजार बॉक्स 110 -150
कलर बॉक्स 80 -110