
Sawan Mangala Gauri Vrat- भगवान शिव को समर्पित और सनतान धर्म के पावन सावन महीने (Sawan 2026) की शुरुआत में अब बस एक सप्ताह का समय बचा है। देश के सभी बड़े शिवालयों में श्रावण मास और सावन सोमवार की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। सावन के सभी सोमवार को शिवजी का व्रत रखा जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत होता है। चलिए ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा से जानते है कि क्या है इस व्रत का महत्व, जानेंगे क्या है सावन का धार्मिक महत्व? ज्योतिषाचार्या से यह भी जानेंगे कि सावन के पहले ही दिन कौनसा शुभ योग बन रहा है।
सावन (Sawan 2026) के महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना का विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है इस दिन जो भी पार्वती और भगवान भोलेनाथ की आराधना करता है उसे सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। इसके फलस्वरूप महादेव ने पार्वती जी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वर दिया। मान्यता है कि जो भी सावन के सोमवार में भगवान भोलेनाथ की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करता है उसे मनचाहा वर या वधू प्राप्त होता है। इसके अलावा सावन के सोमवार का व्रत रखने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और इसके अलावा राहु-केतु का अशुभ प्रभाव दूर होता है।
सुहागिन महिलाओं के लिए सावन के मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat) का खास महत्व होता है। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं,अविवाहित युवतियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए मंगला गौरी की पूजा करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण मंगला गौरी व्रत को विवाह और दांपत्य सुख से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।
भगवान शंकर को जिस तरह से सावन मास प्रिय है। ठीक उसी तरह से मां पार्वती को भी सावन का महीना अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि सावन महीने में सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा करने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। वहीं सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat) रकने से मां पार्वती की कृपा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
इस बार सावन (Sawan 2026) के पहले ही दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिसे शिववास योग कहा जाता है। इस शुभ संयोग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।
पहला मंगला गौरी व्रत - 4 अगस्त 2026
दूसरा मंगला गौरी व्रत – 11 अगस्त 2026
तीसरा मंगला गौरी व्रत – 18 अगस्त 2026
चौथा मंगला गौरी व्रत – 25 अगस्त 2026