
Parthiv Shivling Puja Benefits: श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग बनाने और पूजा से क्या लाभ मिलते हैं? (फोटो सोर्स- Pinterest)
Parthiv Shivling Puja Benefits: पवित्र श्रावण मास (Sawan 2026) के आगमन में दस दिन शेष हैं, लेकिन इसकी तैयारियां सभी बड़े-छोटे शिव मंदिरों में शुरू हो गई है। घरो, शिवालयों और सामाजिक संगठनों में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक की तैयारियां जोरों पर है। सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान चार सावन सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार तीन अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को होगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करने की परम्परा सदियों पुरानी है। इसे केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जबलपुर के मार्कडेयधाम तिलवाराघाट के महंत विचित्रदास ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग का निर्माण मिट्टी, गाय के गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म को मिलाकर किया जाता है। सनातन मान्यताओं में मिट्टी को पंचतत्वों में पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना गया है, जो जीवन की उत्पत्ति और अंत से जुड़ा है। शिव पुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से भय दूर होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
जानकारों के अनुसार मिट्टी में नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है। मंत्रोच्चार के साथ अपने हाथों से मिट्टी को आकार देना एकाग्रता बढ़ाने वाली प्रक्रिया मानी जाती है। यह मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत करने में सहायक होती है।
पार्थिव शिवलिंग पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अन्य प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले जल प्रदूषण की समस्या के विपरीत मिट्टी के शिवलिंग जल में आसानी से घुल जाते हैं। पूजन के बाद इन्हें नर्मदा नदी या जलकुंड में विसर्जित किया जाता है, जिससे प्रकृति के साथ संतुलन बना रहता है।
ज्योतिषाचार्य सचिनदेव ने बताया कि सावन में शहर के कई मंदिरों और घरों में सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंग बनाए जाएंगे। उनके अनुसार जब लोग एक सकारात्मक उद्देश्य के साथ एकत्रित होते हैं, तो सामूहिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनता है। धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
सावन को लेकर बाजारों में दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री की मांग बढ़ने लगी है। व्यापारियों के अनुसार परिवहन लागत बढ़ने से इस बार पूजन थाली और किट की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा, मदार के फूल, जनेऊ, कलावा और रुद्राक्ष से सजी सामान्य पूजन थाली अब करीब 150 से 200 रुपए तक में उपलब्ध होगी। वहीं पंचामृत में उपयोग होने वाले दूध, शहद और देसी घी की कीमतों में वृद्धि का असर भी दिखाई दे रहा है।
Updated on:
20 Jul 2026 02:39 pm
Published on:
20 Jul 2026 02:39 pm
